आईटी छापों के बाद 100 एजेंट्स ने काम रोका:नान के चावल के सप्लाई ऑर्डर एजेंट के पास मिले, 2 करोड़ के फर्जी बिल बनाए

राइस मिलर्स के ठिकानों पर बुधवार से जाारी आयकर विभाग के छापों के बाद बड़े खुलासे हो रहे हैं। विभाग के अफसरों को रामसागरपारा के एक चावल एजेंट के यहां से नागरिक आपूर्ति निगम(नान) के गोदामों से निकलने वाले चावल का डिलिवरी ऑर्डर (डीओ) ​मिला है। ये डीओ 90 लाख का है। यह एक तरह का सरकारी गेट पास है, जो नान के गोदामों से गाड़ी वालों को दिया जाता है। इसमें यह जानकारी होती है कि नान के किस गोदाम से कितना चावल, किस गाड़ी से राशन दुकानों को भेजा गया है। नान से ट्रकों में चावल निकलने के बाद ज्यादातर रामसागरपारा के ही चावल एजेंट तय करते हैं कि चावल का ट्रक किस राइस मिल में जाएगा। इसलिए डीओ भी उन्हीं के पास रहता है। यह सारा सिस्टम नान गोदामों के प्रभारी और एजेंटों की मिलीभगत से चल रहा है। एजेंट्स ने 2 करोड़ के फर्जी बिल भी बनाए हैं। आईटी के छापों के बाद से ही रामसागरपारा के करीब 100 चावल एजेंटों ने कामकाज समेट लिया है। यह सभी छोटी दुकानों से कारोबार कर रहे थे। नान गोदामों का पूरा कंट्रोल इन्हीं एजेंटों के पास है। अभी धान खरीदी के बाद राइस मिलर्स को बड़ी मात्रा में चावल प्रदेश सरकार को देना है। यही वजह है कि राइस मिलर इन एजेंटों से सौदा करते हैं। वे नान का चावल कम कीमत में मिलरों को बेच देते हैं। मिलर इस चावल को सस्ती कीमत में खरीदकर सरकार के पास जमा कर देते हैं। इससे उनके कस्टम मिलिंग का काम आसान हो जाता है।
आयकर विभाग वालों को यहां से मिला क्लू
आयकर विभाग को पिछले महीने इस बात की शिकायत मिली थी कि छत्तीसगढ़ में भारत ब्रांड का जो चावल बांटा गया है उसमें बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से आम लोगों को बांटने के लिए 30 रुपए प्रति किलो की दर से आटा और 34 रुपये प्रति किलो की दर से चावल दिया गया था। चावल की सप्लाई एफसीआई की ओर से की गई थी। लेकिन रायपुर के जिन दो राइस मिलों को यह चावल दिया गया था। उन्होंने आम लोगों को बांटने के बजाय इस राइस मिलरों को बेच दिया। सेंट्रल टीम ने जब इसकी जांच की तो शिकायत सही भी पाई गई। इसके बाद से इस जांच को व्यापक स्तर पर किया गया। पुख्ता जानकारी मिलने के बाद एक साथ छत्तीसगढ़ के कई जिलों में छापे मारे गए।
एक्सपोर्ट कर रहे थे चावल डॉलरों में जमा कर रहे रकम आयकर विभाग ने जिस सत्यम बालाजी और साईं हनुमंत में छापा मारा है उनका बड़ा काम चावल एक्सपोर्ट का है। दोनों चावल कारोबारी कनाडा, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों में चावल एक्सपोर्ट करते हैं। नियमानुसार जितना चावल कस्टम ​मिलिंग में दिया जाता है उतना ही चावल एक्सपोर्ट किया जा सकता है। आयकर विभाग को बड़ा इनपुट मिला कि मिलरों ने सरकार को चावल देने के बजाय पूरा कोटा विदेशों में बेच दिया। इसकी कीमत डॉलर में वसूल की गई। पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद ही छापे मारे गए। नान की रायपुर डीएम भी निशाने पर आयकर विभाग के निशाने पर नागरिक आपूर्ति निगम की जिला प्रबंधक भी आ गई हैं। ​विभाग को कई अहम सुराग मिला है, जिससे यह साबित हो रहा है कि नान के गोदामों से जो सरकारी चावल राइस​ मिलरों तक जा रहा है, उसकी पूरी जानकारी नान डीएम को है। नान के जितने भी सरकारी गोदाम हैं। खासतौर पर रायपुर एक, दो, तीन और मंदिरहसौद गोदाम से रोज कितनी गा​िड़यां राइस मिलों की ओर से भेजी जा रही हैं, इसकी जानकारी उन्हें दी जा रही है। बताया जा रहा है कि हर गाड़ी के पीछे एक निश्चित कमीशन सभी संबंधित लोगों तक पहुंच रहा है। इसलिए राइस मिलरों को पड़ता है सस्ता: किसी भी जिले की सरकारी राशन दुकानों में चावल की सप्लाई नान से ही होती है। राशन दुकानों से इस चावल बीपीएल परिवारों को फ्री मिलता है। एपीएल वालों को 10 रुपए किलो में चावल बेचा जाता है। इसलिए यह चावल सस्ता होता है। लेकिन राशन दुकानों में न जाकर राइस मिलर इस चावल को अपनी तय कीमत में खरीद लेते हैं। इससे चावल बेचने और खरीदने वाले दोनों को ही फायदा होता है। राशन दुकानदारों को भी फ्री चावल का पैसा मिल जाता है।

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