28 जनवरी 2016 को स्मार्ट सिटी मिशन में पहले 20 शहरों में भोपाल का नाम आने के बाद मिशन के संचालन के लिए स्पेशल परपज व्हीकल(एसपीवी) बना और कंपनी के संचालन और महत्वपूर्ण फैसलों के लिए सरकारी अफसरों का एक बोर्ड बनाया गया। इसमें कलेक्टर को चेयरमैन, निगम कमिश्नर को एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया। सीईओ की पदस्थापना की गई। ये तीनों अधिकारी ही स्मार्ट सिटी के कामकाज के लिए जिम्मेदार कहे जा सकते हैं।
बोर्ड बनाने के पीछे तर्क था कि राजनीतिक हस्तक्षेप व सरकारी अड़ंगों के बिना फैसले लिए जा सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अफसरों ने राजनीतिक दबाव और प्रभाव में निर्णय लिए। अब तक 6 कलेक्टर, 7 निगमायुक्त और 8 सीईओ बदल चुके हैं। शुरुआत के 4 वर्षों में ऐसे फैसले लिए गए, जिनसे प्रोजेक्ट पटरी से उतर गया। शुरुआती दो साल स्मार्ट सिटी के सीईओ निगम के तत्कालीन अपर आयुक्त चंद्रमौलि शुक्ला थे। उनके बाद जो सीईओ बने, किसी को भी लंबा कार्यकाल नहीं मिला। कंपनी सीधे नगर निगम से जुड़ी है। कई इंजीनियर व अफसर निगम व स्मार्ट सिटी दोनों में काम कर रहे हैं। इसलिए निगम के काम स्मार्ट सिटी को ट्रांसफर करना आसान था। हालांकि इन मामलों में यूएडीडी को भी लूप में लिया गया। बीडीए के सीईओ भी बोर्ड में सदस्य हैं, इसलिए बीडीए की तंगहाली दूर करने में स्मार्ट सिटी ने मदद कर दी। एबीडी में अधूरे प्रोजेक्ट और जमीनों को लेकर विवाद जहां फ्लैट बनना थे, अब वहां पीएमएवाय का प्रोजेक्ट … स्मार्ट सिटी कंपनी ने टीटी नगर एबीडी एरिया में गुरुद्वारे के नजदीक दो प्लॉट पर एमआईजी और एलआईजी फ्लैट बनाने और ग्राउंड फ्लोर पर मार्केट डेवलप करने का एक प्लान तैयार किया था। यह प्लान इसलिए बनाया गया था, क्योंकि बुलेवर्ड स्ट्रीट बनाने के लिए जवाहर चौक के जिन दुकानदारों को हटाया गया था, वे यहीं पर दुकान दिए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन कंपनी को कोई पार्टनर ही नहीं मिला, अब यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान बनाने की प्लानिंग की गई है। एमएलए क्वार्टर्स की जमीन को लेकर भी विवाद … जवाहर चौक के एमएलए क्वार्टर्स की कुछ जमीन स्मार्ट सिटी के प्लॉटों में आ रही है। खास तौर से जहां मेडिकल स्ट्रीट डेवलप हो गई है, वहां विवाद की स्थिति है। ये विवाद अब कोर्ट चले गए हैं। स्मार्ट दशहरा मैदान अधूरा… 31 करोड़ से दशहरा मैदान को स्मार्ट बनाने का प्रोजेक्ट था। इसे इस तरह डेवलप करना था जहां मेले, बड़ी सभाएं, प्रदर्शनी, खेल आयोजन हो सकें, लेकिन प्रोजेक्ट अधूरा है। 45 करोड़ के हाट बाजार में अब भी कई काम अधूरे हैं। सिग्नेचर टॉवर: 21 करोड़ खर्च, फिर प्रोजेक्ट बंद… कमला नेहरू स्कूल के सामने सिग्नेचर टॉवर नाम से स्मार्ट सिटी का पहला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनना शुरू हुआ। 34.96 करोड़ के प्रोजेक्ट में से 21.06 करोड़ खर्च करने के बाद इसे बंद कर दिया गया। पैन सिटी और नगर निगम के प्रोजेक्ट में ऐसे गया पैसा सबसे ज्यादा चर्चित कंट्रोल कमांड सेंटर ठप
पैन सिटी प्रोजेक्ट का सबसे ज्यादा चर्चित इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) भी ठप हो गया है। भुगतान पर हुए विवाद के बाद कंपनी ने काम छोड़ दिया और मामला कोर्ट में चला गया। निगम का आर्च ब्रिज भी स्मार्ट सिटी का… नगर निगम ने 39 करोड़ की लागत से किलोल पार्क से गिन्नौरी पर आर्च ब्रिज मई 2016 में बनाना शुरू किया। ब्रिज मई 2018 में पूरा होना था। पैसों की कमी से काम अटक गया। बाद में इसे स्मार्ट सिटी को पूरा करना पड़ा। मल्टीलेवल पार्किंग का पेमेंट स्मार्ट सिटी से हुआ… निगम ने 2016-17 में न्यू मार्केट, एमपी नगर और बैरागढ़ में मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण शुरू किया। न्यू मार्केट में 37 करोड़, एमपी नगर में 50 करोड़ व बैरागढ़ में 16.50 करोड़ यानी कुल 103.50 करोड़ की इन मल्टीलेवल पार्किंग में दुकानें नहीं बिक रही थीं। ऐसे में निगम कांट्रेक्टर का पेमेंट नहीं कर पा रहा था। इसमें से 31.05 करोड़ का भुगतान स्मार्ट सिटी से कराया गया। तब यह राशि स्मार्ट सिटी को लौटाने का मैकेनिज्म बना था। लेकिन बाद में राशि स्मार्ट सिटी से लिए जाने वाले प्रॉपर्टी टैक्स आदि में एडजस्ट कर दी गईं। 640 करोड़ के स्मार्ट पोल पर स्ट्रीट लाइट… पीपीपी आधार पर शहर में 150 स्मार्ट पोल लगाए गए। इन पोल का उपयोग सिर्फ स्ट्रीट लाइट के लिए हो रहा है, जबकि इनसे पब्लिक एड्रेस सिस्टम, फ्री वाई-फाई, डिस्प्ले जैसी कई सुविधाएं मिलने की बात कही गई थी।


