भास्कर न्यूज | राजनांदगांव चक्रधर कथक कल्याण केन्द्र संगीत महाविद्यालय द्वारा आयोजित कल्याण संगीत समारोह और निशुल्क कला शिविर में कलाकारों ने मन मोह लेने वाली प्रस्तुति दी। यह आयोजन महाविद्यालय की स्थापना के 43 वर्ष पूरे होने पर हुआ। संस्थापक डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा के प्रयास से पिछले 35 वर्षों से यह शिविर अखिल भारतीय स्तर पर निशुल्क आयोजित है। रायगढ़ नरेश राजा चक्रधर सिंह के ग्रंथ ‘मुरज पर्ण पुष्पाकर’ और ‘नर्तन सर्वस्वम’ दुर्लभ बंदिशों में कथक कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया गया। रायगढ़ कथक घराने के वरिष्ठ गुरु डॉ. भगवान दास माणिक महंत ने प्रशिक्षुओं को घराने की विशेषता सिखाईं। नृत्याचार्य प्रो. कल्याण दास महंत के वह नाती हैं। ग्वालियर में कथक की सेवा कर रहे हैं। डॉ. भगवान दास, डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा, कल्याण दास महंत के शिष्य हैं। इस समारोह में आगरा की शास्त्रीय गायिका अर्चना तलेगांवकर ने प्रभावशाली गायन किया। रायगढ़ की ज्योति बोहिदार वैष्णव ने रुद्राष्टकम की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन कालाकारों को दर्शकों से सराहना मिली। मध्य भारत एवं छत्तीसगढ़ का प्रथम स्नातक संगीत कॉलेज संगीत सम्राट राज चक्रधर सिंह महराजा एवं उनके दरबारी नृत्याचार्या प्रो. कल्याण दास महंत के नाम से 43 वर्षों से यह आयोजन किया जा रहा है। बाल कलाकारों ने रंगारंग कथक नृत्य प्रस्तुत किया कथक साधकों ने रुद्र ताल में ‘नर्तन सर्वस्वम्’ ‘मुरज पर्ण पुष्पाकर’ की दुर्लभ प्रस्तुति दी। सारंगी वादक सफीक हुसैन ने स्वतंत्र वादन से श्रोताओं का मन मोह लिया। बाल कलाकारों ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया। तबला वादक दीपक चंद्रा एवं शरद मेश्राम ने शानदार प्रस्तुति दी। समारोह में अधिवक्ता विष्णु साव, समाजसेवी अशोक चौधरी और नागपुर के छन्नू लाल जायसवाल ने संबोधन दिया। कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत गायन, नृत्य और विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्रों में कालाकारों द्वारा कला का प्रदर्शन कर तालियां बटोरी गई।


