मानतुंगगिरी तीर्थ क्षेत्र पर सोमवार को समाधिस्थ आचार्य भरत सागर महाराज का स्मृति दिवस एवं गुरु मंदिर स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। समारोह में समाज जनों के अतिरिक्त गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि स्थानों से बड़ी संख्या में भक्तजन शामिल हुए। गुरु पूजन और महिलाओं ने नृत्य करते हुए अर्ध चढ़ाकर पूजन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रतिवर्ष यहां पर हजारों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा व्यक्त करने आते हैं। आचार्य भरत सागर जी की महानतम मानतुंगगिरी तीर्थ एक अनुपम देन है। आज वे हमारे बीच में भले ही नहीं है लेकिन उनका यह अनुपम तीर्थ क्षेत्र पूरे भारतवर्ष में पहला तीर्थ क्षेत्र है। जैन समाज का सबसे प्रिय और श्रद्धा युक्त पाठ भक्तामर की अद्भुत यहां रचना की गई है। यह सर्व विदित है कि भक्तामर पाठ की रचना धार में आचार्य मानतुंगाचार्य ने राजा भोज के शासनकाल में की थी। इस तीर्थ क्षेत्र का संचालन पूरी क्षमता के साथ चंद्रमति माताजी कर रही है। भव्य मंदिर बनाने की योजना प्रस्तावित मानतुंगगिरी प्रबंध समिति के अध्यक्ष नरेश गंगवाल ने कहा कि इस तीर्थ क्षेत्र की बाउंडरी वॉल और एक भव्य मंदिर बनाने की योजना प्रस्तावित है। इसमें सभी के सहयोग की जरूरत भी है। पूरे समारोह को आचार्य विप्रणतसागर जी एवं चंद्रमति माताजी का पूरा सानिध्य प्राप्त हुआ। समारोह में आचार्य विप्रणत सागर जी एवं चंद्रमति माता जी ने भी अपने आशीर्वचन दिए। आचार्य विप्रणत सागर जी ने पूरे तीर्थ क्षेत्र का अवलोकन कर अपनी खुशी जाहिर की और कामना की कि जल्द निर्माण पूरा होगा। प्रारंभ में मंगलाचरण सुरभि रावका तथा साक्षी रावका ने प्रस्तुत किया। निर्माण कार्य की जानकारी आशीष जैन इंजीनियर ने दी। अतिथि स्वागत विनय छाबड़ा ने किया। आचार्य भरत सागर जी पाद पक्षालन कुसुम लक्ष्मी परिवार एवं आचार्य विपण््रात सागर जी का पाद पक्षालन नरेश कुमार सुनील कुमार परिवार ने किया। माताजी को शास्त्र भेंट करने का लाभ किशोर कुमार अविनाश परिवार को मिला। मंदिर पर ध्वजा चढ़ाने का लाभ आनंदीबेन कोठारी अहमदाबाद को प्राप्त हुआ।


