आचार्य महाश्रमण के विहार में भावुक हुए भक्त:महाप्रज्ञ विहार से आचार्य के साथ चला उदयपुर, प्रवचन में अभय दान का संकल्प कराया

झीलों की नगरी उदयपुर में आए आचार्य महाश्रमण ने आज उदयपुर शहर विहार कर लिया। दोपहर में जैसे ही आचार्य का संतों के साथ विहार का समय हुआ तब हजारों भक्त वहां पहुंचे। आचार्य के साथ जैसे ही धवलवाहिनी ने भुवाणा स्थित महाप्रज्ञ विहार से अपने कदम आगे बढ़ाए तो भक्तों ने महाश्रमण की जयकारा गूंजायमान कर दिया। इस दौरान जुटी जनमेदिनी आचार्य के विहार पर भावुक हो गई। इससे पहले आज उदयपुर में महाप्रज्ञ ने दान पर अपनी बात रखी और सबसे बड़ा दान अभय दान बताते हुए विस्तार से उसके बारे में बताया। बुधवार को आचार्य अपनी धवल सेना के साथ दोपहर तीन बजे महाप्रज्ञ विहार किया। विहार में आचार्य के साथ कई भक्तों ने भी पैदल विहार किया। कुछ समय तक साथ चलते हुए आचार्य का जयकारा लगाया। आचार्य ने उदयपुर वासियों को मांगलिक श्रवण कराया और उदयपुर से राजसमंद की तरफ बढ़ गए। आज आचार्य ने उदयपुर शहर से निकल कर करीब 6 कि.मी. की दूरी तय कर नाथद्वारा हाइवे पर सुखेर-अम्बेरी स्थित तेरापंथ सभा के अध्यक्ष कमल नाहटा के प्रतिष्ठान पहुंचे। विहार के दौरान पूरे मार्ग में जगह-जगह जयकारों के साथ आचार्य का वन्दन अभिनन्दन किया गया। आचार्य रात्रि विश्राम करने के बाद सुबह आगे चीरवा होकर नाथद्वारा की तरफ बढ़ेगे। सभी दानों में सबसे बड़ा अभय दान
तेरापंथ जैन समाज के आचार्य महाश्रमण ने महाप्रज्ञ विहार में प्रात:कालीन धर्म सभा में दान के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि जीवन में कई तरह के दान होते हैं जैसे विद्यादान, वस्त्रदान, अर्थदान, देहदान आदि-आदि लेकिन इनमें सबसे बड़ा दान अभय दान माना गया है। यह इसलिए क्योंकि इसमें जीवन बचाने का संकल्प होता है। साधना में सम्यक साधना ओर सामयिक का बड़ा महत्व
आचार्य ने कहा कि साधनाओं के भी कई रूप होते हैं लेकिन हर साधना की प्रवृत्ति अहिंसा की चेतना का विकास करने की होनी चाहिये। साधना में सम्यक साधना ओर सामयिक का बड़ा महत्व होता है। यूं तो सामयिक रोजाना हो जाए ऐसा प्रयास करना चाहिये। उसमें भी अगर समय देखा जाए तो प्रात: अमृकाल सामयिक का सबसे महत्वपूर्ण और श्रेष्ठ समय होता है। ध्यान ओर साधना से विभिन्न प्रकार के कषाय, मोह-माया और लोभ से मुक्ति की ओर बढ़ा जा सकता है। पंचरंगी पाण्डाल जहां खचाखच भरा
तेरापंथ जैन समाज के आचार्य महाश्रमण के उदयपुर प्रवास के तीसरे दिन महाप्रज्ञ विहार में सवेरे से लेकर उनके विहार होने तक आचार्य के दर्शनार्थ एवं प्रवचन लाभ लेने के लिए श्रद्धा का ऐसा ज्वार उमड़ा कि वह अपने आप में एक महोत्सव बन गया। महाप्रज्ञ विहार में बना विशाल पंचरंगी पाण्डाल जहां खचाखच भरा था वहीं पाण्डाल के बाहर भी उतने ही श्रद्धालु आचार्य के दर्शन का लाभ लेने अनुशासित एवं कतार बद्ध खड़े नजर आये। हर किसी की यही चाहत थी कि चौदह सालों बाद आचार्य का उदयपुर में पदार्पण हुआ है, और उदयपुर वालों के लिए यह ऐसा एक स्वर्णिम अवसर है जब आचार्य को करीब से निहार सकें और उनका आशीर्वाद लेने का परम सौभाग्य प्राप्त कर सकें। युवा-बुजुर्ग सहित हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने दिन भर आचार्य का वन्दन किया। तेरापंथ सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक पगारिया ने विहार कार्यक्रम की जानकारी दी। समाज की पूरी टीम जुटी थी
आचार्य की यात्रा को लेकर समाज की पूरी टीम यहां जुटी थी। धर्मसभा में तेरापंथ सभा के अध्यक्ष कमल नाहटा, तेरापंथ सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक पगारिया, सभा उपाध्यक्ष विनोद कच्छारा, सभा के मंत्री अभिषेक पोखरना, कोषाध्यक्ष भगवती सुराणा, कार्यालय व्यवस्थापक प्रकाश सुराणा, अर्जुन खोखावत, कमल पोरवाल, मनोज लोढ़ा सहित जैन समाज के विशिष्ठ जन उपस्थित थे। यह सम्पूर्ण आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मण्डल, तेरापंथ प्रोफेशन फोरम, अणुव्रत समिति, तेरापंथ किशोर मंडल एवं तेरापंथ कन्या मण्डल के साझे में किया जा रहा है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *