आचार्य रामानंददास ने दशरथ श्रवणकुमार प्रसंग व राम-भरत मिलाप की व्याख्या की

भास्कर न्यूज | चित्तौड़गढ़ शहर की मधुवन कॉलोनी स्थित सीताराम मंदिर हाथीकुंड में नीलकंठ महादेव महोत्सव समिति की ओर से आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ जारी है। कथा के आठवें दिन मधुवन सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और रामकथा श्रवण का पुण्य लाभ लिया। रामकथा मर्मज्ञ आचार्य डॉ. रामानन्ददास महाराज ने अपने ओजस्वी वाणी प्रवाह में चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक गौरव और वीर भूमि का यशोगान करते हुए कथा का शुभारंभ किया। प्रारंभ में पूर्व विधायक बद्रीलाल जाट, शक्तिसिंह राणावत और श्यामलाल शर्मा भी कथा श्रवण के लिए पहुंचे। कथा में आचार्य ने दशरथ–श्रवणकुमार प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि भगवान राम के वनवास के पश्चात राजा दशरथ को पुत्र वियोग में मृत्यु की आशंका क्यों सताने लगी। उन्होंने बताया कि श्रवणकुमार के माता-पिता द्वारा दिए गए श्राप की स्मृति ही दशरथ के मन को व्याकुल कर रही थी। स्वामीजी ने कहा कि यह प्रसंग हमें कर्म, पश्चाताप और दायित्व बोध का संदेश देता है। आज की कथा में राम-भरत मिलाप के अलौकिक दृश्य का जीवंत वर्णन किया गया। स्वामीजी ने भरत को त्याग, विश्वास और निष्कलंक भक्ति का साक्षात स्वरूप बताया। उन्होंने तुलसीदास के प्रसिद्ध दोहे का भावार्थ समझाते हुए कहा कि विश्वास के बिना भक्ति संभव नहीं और प्रभु कृपा के बिना जीवन में शांति नहीं मिलती। आयोजन समिति सदस्य दिनेशकुमार आगाल ने बताया कि नौ दिवसीय कथा में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। स्थानीय कवि राजेन्द्र जांगीड़ ने कथा की स्मृति स्वरूप स्वरचित कविता अंकित फोटो फ्रेम भेंट किया। कार्यक्रम में समिति के प्रदीप कुमार आगाल, मुकेश आगाल, ओमप्रकाश सुखवाल, दिनेश गर्ग, एसके सचान, झमकलाल सुखवाल, दिनेश मेनारिया, संजय शर्मा, भगवतीलाल सुखवाल, केपीसिंह राणा, योगेश शर्मा, गोपाल मेनारिया, आशुतोष आग़ाल, विजय मेहता, जानकीलाल गदिया, घनश्याम शर्मा उपस्थिति रहे।

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