इंदौर में महावीर नगर ग्राउंड पर आयोजित श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के पांचवें दिन संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज का प्रथम समाधि दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर मुनिश्री विनम्र सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज पुरुषार्थ से नहीं, बल्कि देवयोग से सभी को मिले थे। मुनिश्री ने कहा कि देव शक्तियां किसी महापुरुष का सहारा लेकर काम करती हैं। जैसे सरस्वती देवी ने इस धरती पर गुरुवर का सहारा लिया और अपना कार्य पूर्ण किया। उन्होंने चारित्र के पहाड़ के रूप में रहकर सभी को चारित्र जीवन की प्रेरणा दी। गुणानुवाद सभा में वरिष्ठ समाजजन ने विचार रखे कार्यक्रम में आचार्य 108 समय सागरजी महाराज की आज्ञानुसार आयोजित गुणानुवाद सभा में वरिष्ठ समाज बंधुओं ने अपने विचार रखे। हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने विधान की विधि में भाग लिया। आचार्यश्री के समाधि स्थल पर हजारों महिलाओं ने पूजन और आरती की। समारोह में विशेष लेजर लाइट शो का भी आयोजन किया गया। मुनिश्री विनम्र सागर ने यह भी कहा कि गुरुदेव के जीवन ने यह साबित कर दिया कि इस धरती पर भगवान नाम की शक्ति आज भी मौजूद है। उन्होंने गुरुदेव का कथन याद करते हुए कहा कि जो एक अच्छा शिष्य बनना जानता है, वह कभी भी एक अच्छा गुरु बन सकता है। समवशरण पर 36 अर्घ्य समर्पित किए दयोदय फाउंडेशन चेरिटेबल ट्रस्ट एवं कल्पद्रूम महामंडल विधान महोत्सव समिति संरक्षक राजेश उदावत, अध्यक्ष राहुल जैन (स्पोटर््स वल्र्ड), मनीष नायक एवं मीडिया प्रभारी राजीव जैन ने बताया कि महामंडल विधान के पांचवे दिन सुबह के सत्र में मुनिश्री के सान्निध्य एवं विधानाचार्य ब्रह्मचारी अनिल भैया, डॉ. अभिषेक जैन एवं डॉ. आशीष जैन के निर्देशन में शांतिधारा व पूजन की विधियां संपन्न की गई। सुबह के सत्र में हुई शांतिधारा के लाभार्थी सचिन जैन एवं सतीश डबडेरा परिवार थे। वहीं आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर आचार्य छत्तीसी विधान हुआ जिसमें सभी इंद्र-इंद्राणियों व श्रावक-श्राविकाओं ने कल्पद्रुम विधान के निमित्त समवशरण पर 36 अर्घ्य समर्पित किए। विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों का किया सम्मान दोपहर में मुनिश्री एवं उनके ससंघ के सान्निध्य में गुणानुवाद सभा आयोजित हुई। जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाई के धर्मगुरुओं और प्रतिनिधियों के साथ ही वक्ताओं ने भी आचार्यश्री के जीवन चरित्र पर अपने विचार रखें एवं उन्हें विनयांजलि अर्पित की। गुणानुवाद सभा के पश्चात प्रो. राजीव शर्मा (हिंदू धर्म प्रतिनिधि), डॉ. इशरत अली (मुस्लिम धर्म प्रतिनिधि), फादर पायम (ईसाई धर्म) एवं ग्रंथी सज्जन सिंह (सिख) का बहुमान किया गया। गुणानुवाद सभा में सात हजार से अधिक समाज बंधुओं ने पहुंचकर सामूहिक रूप से आचार्यश्री को विनयाजंलि दी। समाधि दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में 140 दिगंबर व श्वेताम्बर जिनालय के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में शामिल हुए थे। सुबह प्रवचन व गुणानुवाद सभा के दौरान नरेंद्र जैन, मनोज बाकलीवाल, सतीश डबडेरा, मनीष नायक, धर्मेंद्र जैन, विपुल बांझल, दिलीप पाटनी, जैनेश झांझरी, आनंद जैन सहित हजारों की संख्या में समाज बंधु उपस्थित थे।


