आज का दुख कल सुख लाएगा यह आस धैर्य रखना सिखाती है

भास्कर न्यूज | बालोद ग्राम सिर्राभांठा में तीन दिवसीय हरि नाम संकीर्तन भजन हुआ। ग्राम के विष्णु-लक्ष्मी नारायण मंदिर प्रांगण में आयोजित इस संकीर्तन में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कथावाचक एवं व्याख्याकार कामता प्रसाद शरण ने भजनों एवं कथाओं से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा प्रसंग के दौरान कामता प्रसाद शरण ने श्रद्धालुओं से भगवान पर अटूट भरोसा रखने की अपील की। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर और माता लक्ष्मी की कृपा से ही वे आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सुख-दुख दोनों भगवान की ही देन हैं, आज दुख है तो कल सुख अवश्य मिलेगा। जीवन में सुख-दुख दोनों आते-जाते रहते हैं, जैसे धूप-छांव या रात-दिन और यह सब जीवन का हिस्सा हैं। आज का दुख कल सुख लाएगा, यह आशा व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, जिसे कर्मों का फल या प्रकृति का चक्र भी माना जाता है, जो व्यक्ति को हर परिस्थिति में समभाव रखने का संदेश देता है। निंदा करने वालों को भी अपना गुरु मान लें, अभिमान से दूर रहें उन्होंने निंदा करने वालों को भी अपना गुरु मानने की बात कही और अभिमान से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि निंदक आपके दोषों को उजागर करके आपको सुधारने में मदद करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे माता-पिता बच्चों को सही रास्ता दिखाते हैं। निंदा को एक ऐसे दर्पण के रूप में देखा जाता है जो स्वयं को सुधारने का अवसर देती है, हालांकि गुरु की निंदा करना वर्जित है, पर दूसरों की निंदा से सीखने की बात कही गई है। साथ ही भक्त चंद्रहास के महाराजा बनने की संघर्षपूर्ण कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को प्रेरित किया।

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