‘आज के समय में 100 प्रतिशत समर्थन मिलना लगभग नामुमकिन’:भास्कर उत्सव में बोले सुधीर चौधरी- पत्रकारिता पद से नहीं, मंशा से तय होती है

दैनिक भास्कर जयपुर संस्करण के 30वें गौरवशाली वर्ष के उत्सव के तहत 17 दिसंबर को वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी का सेशन आयोजित किया गया। जयपुर के महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में शाम 5 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में पत्रकारिता, मीडिया की भूमिका, टीआरपी और निष्पक्षता जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत हुई। कार्यक्रम को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोग उन्हें सुनने पहुंचे। सेशन की शुरुआत में सुधीर चौधरी ने अपनी जर्नी का जिक्र करते हुए बताया कि किसी भी प्रोफेशन में सिर्फ पैसे के लिए काम करने से सफलता नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि पैसा एक बाय-प्रोडक्ट है, जब आप ईमानदारी से अच्छा काम करते हैं तो पैसा अपने आप आता है। उन्होंने फिल्म कलाकारों और खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि मीडिया में भी प्रोफेशनल अप्रोच जरूरी है। मीडिया को लेकर सुधीर चौधरी ने कही ये 3 बड़ी बातें 1.पार्टी को 40 प्रतिशत वोट मिलने पर सत्ता मिल जाती है
सुधीर चौधरी ने कहा कि आज के समय में 100 प्रतिशत समर्थन मिलना लगभग नामुमकिन है। चुनावी सिस्टम का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब किसी पार्टी को 40 प्रतिशत वोट मिलने पर सत्ता मिल जाती है, तो हर मुद्दे पर सर्वसम्मति की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है। इसी तरह पत्रकारिता में भी हर खबर पर सभी की सहमति नहीं हो सकती। टीआरपी और खबर की मंशा पर बात करते हुए सुधीर चौधरी ने कहा कि अगर कोई खबर सही इरादे से उठाई जाती है, भले ही वह टीआरपी न लाए, तो वह गलत नहीं है। लेकिन सिर्फ व्यूज और टीआरपी के लिए खबर करना बेईमानी है। उन्होंने जेएनयू से जुड़ी एक रिपोर्टिंग का उदाहरण देते हुए बताया कि जब खबर सही मंशा से की जाती है, तो लोग उसे देखते और समझते हैं। 2. पत्रकार का काम तथ्यों को सामने रखना और सवाल पूछना है
सुधीर चौधरी ने यह भी कहा कि किसी मुद्दे पर स्टैंड लेने पर पत्रकार को अक्सर किसी राजनीतिक खांचे में डाल दिया जाता है। राष्ट्रगान, सेना या किसी सरकारी नीति पर बात करने पर तुरंत यह तय कर दिया जाता है कि पत्रकार किस पक्ष में है, जबकि पत्रकार का काम तथ्यों को सामने रखना और सवाल पूछना है। डीडी न्यूज़ से जुड़े होने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सरकारी प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं, सरकार के लिए नहीं। पत्रकारिता की निष्पक्षता किसी पद या चैनल से तय नहीं होती, बल्कि व्यक्ति की मंशा से तय होती है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग चैनलों में काम करने के बावजूद उनके काम करने का तरीका नहीं बदला। 3. कुछ टीआरपी और लोकप्रियता के लिए काम करते हैं सेशन के दौरान सुधीर चौधरी ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले ही नकली अंडों वाली खबर चलाई। बढ़ते पॉल्यूशन और मनरेगा जैसे मुद्दों पर भी रिपोर्टिंग और एक्सप्लेनर किए हैं। उनका कहना था कि पत्रकारिता में अलग-अलग तरह के लोग होते हैं। कुछ टीआरपी और लोकप्रियता के लिए काम करते हैं, जबकि कुछ जिम्मेदारी के भाव से समाज के लिए सवाल उठाते हैं। दैनिक भास्कर के 30वें साल के उत्सव के तहत 13 दिसंबर से शुरू हुए ये कार्यक्रम 22 दिसंबर तक चलेंगे। भास्कर उत्सव के दौरान आगे भी अलग-अलग विषयों और फॉर्मेट में सेशन आयोजित किए जाएंगे, ताकि पाठकों और शहर के लोगों को नॉलेज और संवाद से जोड़ा जा सके।

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