बीकानेर में पुष्करणा समाज का सामूहिक विवाह कार्यक्रम फरवरी के किसी भी दिन तय हो सकता है। तारीख तय करने के लिए समाज के विद्वान गुरुवार को शास्त्रोक्त चर्चा करेंगे, जिसके बाद तारीख तय हो सकती है। विजयदशमी के दिन ही गौरी शंकर महादेव मंदिर में चर्चा के बाद तारीख तय होती है। वर को भगवान शिव और वधु को पार्वती मानते हुए पंडित श्रेष्ठ मुहूर्त का चयन करते हैं। माना जा रहा है कि इस बार फरवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह में किसी दिन पुष्करणा सावा घोषित हो सकता है। पुष्करणा सावा समिति के संयोजक नारायण दास व्यास के अनुसार रात करीब साढ़े आठ बजे सावा शोधन के लिए समाज के पंडितों, ज्योतिषाचार्यों व पंचांगकर्ताओं के बीच शास्त्रोक्त चर्चा होगी। जिसमें शास्त्र के आधार पर तारीख तय होगी। वैसे ये पुष्करणा समाज के युवकों और युवतियों के लिए हैं लेकिन इसी दिन अन्य समाज के लोग भी श्रेष्ठ मुहूर्त मानकर विवाह करते हैं। हर दो साल बाद सावा पुष्करणा समाज का सामूहिक सावा पहले चार साल से एक बार होता था लेकिन पिछले कुछ सालों में इसे दो साल के अंतराल से आयोजित किया जा रहा है। एक ही दिन सैकड़ों की संख्या में विवाह होने के कारण खर्च कम आता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सामूहिक विवाह को बढ़ावा दिया जा रहा है। धनतेरस पर सावा थापन पुष्करणा सामूहिक सावा समिति के अध्यक्ष मक्खन व्यास ने बताया कि दशहरा के दिन केवल सावा की तारीख तय होगी लेकिन सावा थापने यानी स्थापित करने की कार्रवाई धनतेरस के दिन होगी। धनतेरस को ही विस्तार से कार्यक्रम जारी होगा कि हाथधान, गणेश परिक्रमा, बरी और बारात की तारीख व समय क्या होगा। यज्ञोपवित संस्कार के लिए भी अलग से कार्यक्रम तय होगा। पूर्व राजपरिवार की अनुमति बीकानेर में पुष्करणा समाज का सावा तय करने से पहले पूर्व राजपरिवार की अनुमति लेने की रस्म अदा की जाती है। लोकतंत्र से पहले राजपरिवार की अनुमति से ही सावे का आयोजन हाेता था। अब लोकतंत्र में भी इस परम्परा का निर्वाह किया जाता है। अब बीकानेर पूर्व की विधायक और पूर्व राजपरिवार की सदस्य सिद्धि कुमारी से मिलने के लिए समाज का एक प्रतिनिधि मंडल जाता है।


