श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़े की पेशवाई (छावनी प्रवेश) आज शुक्रवार को भव्यता के साथ निकलेगी। इसमें 500 से ज्यादा से साधु-संत महाकुंभ मेला क्षेत्र स्थित अपने शिविर में प्रवेश करेंगे। पेशवाई मुंशी राम बगिया, मुठ्ठीगंज से रवाना होगी। इस अखाड़े के संत भगवान शिव की अराधना के साथ ही गुरबाणी का पाठ भी करते हुए भी चलते दिखेंगे। बता दें कि शुरुआती में यह अखाडा बड़ा उदासीन अखाड़े का ही हिस्सा था। इस अखाड़े के संतों ने हमेशा सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा का कार्य किया है। 111 वर्ष पुराना है यह अखाड़ा यह अखाड़ा करीब 111 वर्ष पुराना है। वर्ष 1913 में इस अखाड़े का रजिस्ट्रेशन हुआ था। अखाड़ों के महंतों के अनुसार, बड़ा उदासीन अखाड़े के संतों से वैचारिक मतभिन्नता के बाद महात्मा सूरदास जी की प्रेरणा से एक अलग अखाड़ा स्थापित किया गया. इसी अलग अखाड़े को श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा (हरिद्वार) नाम दिया गया। इसका प्रमुख केंद्र हरिद्वार के कनखल में है। देश की आजादी में इस अखाड़े की अहम रही भूमिका देश की आजादी के आंदोलन में इस अखाड़े के संतों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा के संत सदैव सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा में रत रहते हैं। इस अखाड़े का जोर कर्मकांड के बदले अध्यात्म पर अधिक है। इस अखाड़े में केवल संगत साहब की परंपरा के साधु-संत ही शामिल हैं। अखाड़े के सभी साधु संत वानप्रस्थ जिंदगी जीते है. साधु संत डेरों में रहकर भगवान का ध्यान करते हैं। ये अखाड़ा सनातन धर्म के साथ ही गुरुनानक देव की शिक्षाओं का पालन भी करता है।


