आटे से बनाए जानवरों के अंग, असली बताकर बेचे:बाघ की पूंछ-मूंछ बताकर सूअर के बाल थमाए, असम से मंगाते थे नकली दांत

जबलपुर की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने डिंडौरी में शिकारी गिरोह को पकड़ा है। ये गिरोह बाघों के प्लास्टिक के दांत और आटे से बने एनिमल के प्राइवेट पार्ट बेच रहा था। गिरोह के सदस्य बाजार में इसे असली बताकर 25 से 30 हजार रुपए में बेचते थे। जंगली सूअर और अन्य जानवरों के बाल को बाघ की पूंछ और मूंछ के बाल का ताबीज बेचा जा रहा था। गिरोह के पास से 940 किलो गांजा भी पकड़ा गया है। अफसरों का कहना है कि गिरोह पहले से वन्यप्राणियों की तस्करी में शामिल रहा है। आठ महीने पहले ही गिरोह ने असम से बाघों के नकली दांत मंगाए थे। फॉरेस्ट और पुलिस की टीम इनसे पूछताछ कर रही है कि ये गांजा और बाघों के नकली दांत कहां खपाने वाले थे। पढ़िए रिपोर्ट… पहले जानिए क्या है मामला?
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के जबलपुर रीजन के इंचार्ज राजा खरे बताते हैं, 27 जनवरी को महाराष्ट्र के चंद्रपुर से बाघ के शिकारियों को गिरफ्तार किया था। उनमें से एक फरार होने में कामयाब रहा। ये शिकारी मध्यप्रदेश के पारदी समुदाय से थे। जो गिरफ्तार हुए उनसे पूछताछ में पता चला कि गिरोह के तार डिंडौरी के पडरिया कला के पारदी समुदाय के डेरे से जुड़े हैं। 9 फरवरी को इस डेरे पर स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) और पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने मिलकर छापा मारा। बाघ के नकली दांत, गोह के नकली प्राइवेट पार्ट मिले
तस्करों के डेरे से फॉरेस्ट विभाग को बाघ के 13 दांत, कुछ नाखून, वन्य जीवों के बाल मिले। साथ ही गोह का प्राइवेट पार्ट जिसे सामान्य भाषा में हत्था जोड़ी कहते हैं, वो भी मिला। बाघ और गोह संरक्षित प्राणियों की कैटेगरी में आते हैं। जब एक्सपर्ट ने इसकी जांच की तो पता चला कि ये नकली है। गोह के प्राइवेट पार्ट को आटे से बनाया गया था। इसी तरह बाघ के दांतों को एक्सपर्ट ने जांचा तो साफ हो गया कि यह हार्ड प्लास्टिक के बने हैं। एसटीएसएफ को पारदियों के डेरे से तलवार, प्राणियों को फंसाने वाला फंदा, करंट लगाकर मारने वाले तार और 44 जिंदा प्रेशर बम भी मिले हैं। राजा खरे बताते हैं कि पारदी समुदाय इन बमों को आटे की लोई में फंसाकर शिकार के अंदर रख देते हैं, जैसे ही जानवर शिकार को चबाता है तो बम फट जाता है और जानवर की मौत हो जाती है। साल 2018 में भी पारदियों के डेरे से 40 जिंदा बम मिले थे। वन अधिकारी बोले- अंधविश्वास को देते हैं बढ़ावा
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक गिरोह के लोग असली शिकार भी करते हैं। इनके कॉन्टैक्ट बड़े तस्करों से हैं। साथ ही नकली दांत और बाल बेचकर ये अंधविश्वास को मानने वाले लोगों को मूर्ख बनाते हैं। उनसे इसके एवज में मोटी रकम वसूलते हैं। आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में ताबीज भी बरामद हुए हैं, जिसमें जंगली सूअर के बाल सहित अन्य वन्य प्राणियों के बाल भरकर बेचे जाते हैं। अंधविश्वास को मानने वालों को बताया जाता है कि ताबीज में शेर की मूंछ या पूंछ का बाल है, जिससे ताकत मिलेगी। पर्यावरण मंत्रालय की एसआईटी कर रही मॉनिटरिंग
वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक गिरोह के तार मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड से लेकर असम तक फैले हैं। पूरे मामले पर केंद्र सरकार की पर्यावरण मंत्रालय की एसआईटी नजर रख रही है। एसआईटी के कोऑर्डिनेशन के बीच महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में वन विभाग की टीम सर्चिंग कर रही है। अब जानिए कैसे मिला 940 किलो गांजा एसटीएफ जबलपुर के एसपी राजेश भदौरिया ने बताया, पहले सूचना वन्यप्राणियों के तस्करों से जुड़े होने की ही थी। हमने इनके डेरे पर नजर रखना शुरू किया। पुलिस और फॉरेस्ट की 5 टीमों ने जैसे ही छापा मारा, डेरे के ज्यादातर पुरुष जंगल में भाग गए। एक नाबालिग और एक सदस्य पकड़ा गया। इसके बाद गिरोह के अपराध करने और बचने के तरीके पर ध्यान दिया। एसपी ने बताया कि गुना से लेकर राजगढ़ तक सक्रिय पारदी समुदाय लूट के माल को जमीन में गाड़ देता है। इस लीड पर आगे बढ़े। डेरे और आसपास खुदाई की तो 2-3 फीट खोदने पर गांजे के पैकेट मिले। इसके बाद जेसीबी से पूरे इलाके की खुदाई की तो 940 किलो गांजा बरामद किया। गिरोह बिहार से लाया था गांजा
एसटीएफ एसपी भदौरिया के मुताबिक गांजे की बाजार कीमत 3.5 करोड़ रुपए है। इसके अलावा तस्करों के डेरे से जो बाइक मिली हैं उनकी कीमत दो-तीन लाख रुपए है। इस तरह बरामद माल की कुल कीमत करीब 4.5 करोड़ रुपए आंकी गई है। गिरोह का जो सदस्य पकड़ा गया है, उससे पूछताछ में पता चला है कि ये वन्य प्राणियों का शिकार और तस्करी का ही काम करते थे। पिछले 7 महीने से गांजे की तस्करी कर रहे हैं। कटनी से आकर जंगल में बसे, 12 साल तक जांच नहीं
पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि डिंडौरी से पहले पारदियों का डेरा कटनी में था। करीब 12 साल पहले ये लोग परिवार समेत डिंडौरी आए और जंगल के नजदीक बस गए। धीरे-धीरे इन्होंने अपने कागजात भी तैयार करा लिए। ये लोग मूलत: झारखंड के हैं और अपने ठिकाने बदलकर जांच एजेंसियों को चकमा देते हैं। ———– ये खबर भी पढ़ें… जमीन में गाड़ रखा था 940 किलो गांजा:डिंडौरी के जंगल में एसटीएफ ने जेसीबी से खुदवाकर निकाला गांजा तस्करों के खाते में थे लाखों रुपए:महंगी बाइक के शौकीन; नाम से नहीं इमोजी से मोबाइल नंबर करते थे सेव

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