आत्मज्ञान पूर्ण गुरु की शरण में ही संभव: साध्वी

भास्कर न्यूज | अमृतसर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से राम तलाई मंदिर में सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी नीरजा भारती ने कहा कि धरती पर महापुरुषों का अवतरण कभी भी साधारण या निर्थक नहीं होता। वे केवल किसी पंथ, परंपरा या रीति-रिवाज को बढ़ाने नहीं आते, बल्कि उनका उद्देश्य मानव को उस परम सत्य से परिचित कराना होता है, जिसे वह स्वयं प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें। साध्वी ने बताया कि ब्रह्मज्ञान ही वह दिव्य साधन है, जिसके द्वारा मनुष्य के भीतर विद्यमान शाश्वत प्रकाश प्रकट होता है। जब तक यह ज्ञान प्राप्त नहीं होता, तब तक धर्म केवल पुस्तकों, कथाओं और शब्दों तक सीमित रह जाता है। परंतु जैसे ही किसी पूर्ण गुरु की कृपा से आत्मज्ञान का अनुभव होता है, जीवन की दिशा ही बदल जाती है। मनुष्य अज्ञान से ज्ञान की ओर, स्वार्थ से करुणा की ओर और बाहरी दिखावे से आंतरिक अनुभूति की ओर अग्रसर होने लगता है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज अनेक बार हम महापुरुषों के वास्तविक संदेश को भुलाकर केवल उनके नाम का प्रचार करने में लग जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि धर्म आत्मिक उन्नति का साधन बनने के बजाय मात्र परंपराओं और औपचारिकताओं का बोझ बन जाता है। तब मनुष्य भक्ति के मार्ग पर चलने के स्थान पर दूसरों से श्रेष्ठ दिखने की प्रतिस्पर्धा में उलझ जाता है। साध्वी जी ने एक सरल किंतु प्रभावशाली उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे चम्मच रोज भोजन में रहता है, फिर भी स्वाद से वंचित रहता है, वैसे ही यदि हम केवल धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें और उनके भीतर छिपे तत्वज्ञान को न समझें, तो हमारा ज्ञान भी सतही ही रह जाता है।

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