झारखंड के सिनेमा, संगीत, कला व स्थानीय भाषाओं के संरक्षण तथा कलाकारों के कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंच प्रदान करने के लिए ‘धरोहर : सम्मान और संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली कलाकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से फिल्म नीति, वितरण प्रणाली और सिनेमाघरों की भूमिका पर भी गहन चर्चा की गई। पैनल डिस्कशन में धरोहर की अध्यक्ष मोनिका मुंडू ने बताया कि हमारी माटी में छिपी कहानियां, हमारी भाषाएं और हमारा संगीत ही असली पहचान है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कलाकारों को पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और आवश्यक प्रोत्साहन योजनाओं के द्वारा कल्याण प्रदान हो, जिससे हमारी सांस्कृतिक धरोहर अनवरत सशक्त बनी रहे। अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार निरंजन कुजूर ने कहा कि आदिवासी भाषाओं और बोलियों को फिल्म के माध्यम से संरक्षित करना आवश्यक है। आदिवासी सिनेमा को लिकर पूरा विश्व संजीदा है, झारखंड सरकार को पहल करनी चाहिए। यह न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखेगा, बल्कि युवा पीढ़ी में भी आत्म-विश्वास और पहचान का संचार करेगा। संस्कृति को संरक्षित करने के लिए हम मिलकर प्रयास करें : मनपूरण नायक नागपुरी कलाकार मनपूरण नायक बोले- मेरे व्यक्तिगत संघर्ष के माध्यम से मैंने सीखा है कि कला में आत्मविश्वास और समर्पण ही सफलता की कुंजी है। हमारी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए हमें मिलकर प्रयास करने चाहिए। फिल्मकार सेराल मुर्मू ने बताया कि मौजूदा फिल्म नीति न तो हमारे कलाकारों के संरक्षण में सक्षम है और न ही हमें आवश्यक आर्थिक सहायता प्रदान कर पाती है। इसके साथ ही सिनेमेटोग्राफर श्वेता गुडि़या ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में उपस्थित साहित्य अकादमी के सदस्य व साहित्यकार महादेव टोप्पो ने बताया कि 25 वर्षों से सपनों में संजोई कला अकादमी की स्थापना के लिए ठोस कदम उठाने जरूरी हैं। वहीं, सीआर हेम्ब्रम चित्रकला में उपेक्षा को रोकने के लिए नीतिगत व वित्तीय सहायता की मांग की। कार्यक्रम में झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में अतिथियों को सम्मानित करते फिल्मकार दीपक बाड़ा और गायिका मोनिका मुंडू।


