रांची | नामकुम प्रखंड की डूंगरी पंचायत स्थित दस माइल चौक जतरा मैदान में रविवार को धर्मांतरण के खिलाफ जनाक्रोश सभा आयोजित की गई। इसमें विभिन्न सामाजिक और आदिवासी संगठनों के लोगों के साथ-साथ रूदि प्रथा का पालन करने वाले ग्राम प्रधान एवं सीमावर्ती राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस दौरान अंधविश्वास, चंगाई और बीमारी ठीक करने के नाम पर भोले-भाले आदिवासी-जनजातियों के कथित मतांतरण व धर्मांतरण का विरोध किया गया। आदिवासी संगठन के लोगों ने परंपरागत रूढ़ि-प्रथा व पहचान बचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में आदिवासी सरना बचाओ महारैली की संयोजक मेघा उरांव ने कहा कि धर्मांतरण के खिलाफ और समाज की पहचान, रूढ़ि-प्रथा, हक और अधिकार की रक्षा के लिए समाज खुलकर सामने आएं। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें आदिवासी व जनजाति समाज को दीमक की तरह खत्म कर रही हैं। सभा को जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेशा राम भगत, पूर्व जज मध्य प्रदेश प्रकाश सिंह उइके, कृपाशंकर भगत, संदीप उरांव सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। सभा में नगाड़ा बजा कर कई प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें मुख्य रूप से मूल धर्म की पूजा पद्धति और रूढ़ि प्रथा के प्रति समाज को जागरूक करना, रूढ़ि-प्रथा का पालन करने वाले जनजातियों को संवैधानिक अधिकारों की जानकारी देना, पेसा कानून जल्द लागू करना और धर्मांतरण कानून 2017 को कड़ाई से लागू करने का प्रस्ताव शामिल था। इसके अलावा डी-लिस्टिंग कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने और गांव से चंगाई सभा को तत्काल बंद करने की बात कही गई।


