बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में सोमवार को छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने अपनी लंबित मांगों पर प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने के विरोध में सांकेतिक चक्काजाम किया। यह प्रदर्शन ग्राम जामवन्तपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-343 पर करीब आधे घंटे तक चला। आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने 02 फरवरी को कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में ग्राम जामवन्तपुर, तहसील रामानुजगंज स्थित भूमि खसरा नंबर बा-141, रकबा 2.430 हेक्टेयर का जिला स्तरीय टीम गठित कर सीमांकन कराने की मांग की गई थी। साथ ही धारा 170(ख) के अंतर्गत माननीय न्यायालय आयुक्त, गुजा संभाग, अंबिकापुर द्वारा 06 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन की भी मांग की गई थी। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया था कि मुईनी उर्फ निया सिंह के विरुद्ध लक्ष्मण, रामवृक्ष सहित अन्य 11 लोगों से संबंधित प्रकरण में न्यायालय के आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया है। आश्वासन नहीं मिलने से बढ़ी नाराजगी ज्ञापन दिए जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का आश्वासन नहीं मिलने से आदिवासी समाज में नाराजगी बढ़ गई थी। इसी के विरोध में सर्व आदिवासी समाज ने पूर्व सूचना देते हुए 09 फरवरी 2026 को NH-343 पर सांकेतिक चक्का जाम किया। चक्का जाम की सूचना मिलते ही मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके। मौके पर तैनात किया गया भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचे तहसीलदार मनोज पैकरा ने आंदोलनकारियों से चर्चा की और एक सप्ताह के भीतर जिला स्तरीय टीम गठित कर भूमि का सीमांकन कराने का आश्वासन दिया। तहसीलदार के इस आश्वासन के बाद आदिवासी समाज ने अपना सांकेतिक चक्का जाम समाप्त कर दिया। मांगें पूरी नहीं हुई तो फिर होगा आंदोलन इस दौरान सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों का निराकरण नहीं होता है, तो समाज पुनः आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाले किसी भी उग्र आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


