आधी रात घरों में घुसा पानी, हम जान बचाकर भागे:आंगन में बह रहा पानी, हाथ-पैर गले, जिंदगी नर्क बनी; सरकारी मदद नहीं आई

22-23 अगस्त की रात को बहुत तेज बारिश हो रही थी। सूचना भी थी कि भाखड़ा डैम से पानी छोड़ा जाएगा। मगर, हमने सोचा नहीं था कि पानी हमारे घर तक पहुंच जाएगा। आधी रात को हमारे घर पानी पहुंच गया। सामान तैरने लगा। पानी बहुत मिट्टी वाला था, जिसमें कई चीजें आ रही थीं। ऐसे में तुरंत हम बच्चों को साथ लेकर घर छोड़ भाग निकले। दो दिन के बाद जब पानी थोड़ा उतरा तो हम घर आए। देखा कि सारा सामान खराब हो चुका है। घर में एक दुकान थी, उसका सामान भी खराब हो गया था। मेरा पोल्ट्री फॉर्म भी पानी की चपेट में आ गया था, जिससे सारी मुर्गियां तक मर गईं। तीन कनाल जमीन बह गई। अब 15 दिन बाद भी हालात ये हैं कि घर के सामने सड़क के साथ से 3 से 4 फुट पानी बह रहा है। पूरी रात जागकर काट रहे हैं। पत्नी डिप्रेशन में है। पता नहीं चल रहा है कि आगे क्या होगा। जिंदगी नरक सी बन गई हैं। सरकार को तुरंत मुआवजा देना चाहिए। 1988 के बाद ऐसी स्थिति बनी। यह व्यथा है रूपनगर (रोपड़) जिले के गांव जिंदबड़ी के रहने वाले प्रेम सैनी की, जो तेज बारिश और भाखड़ा डैम से छोड़े गए पानी की वजह से बेघरों जैसी जिंदगी जी रहे हैं। यह दर्द अकेले प्रेम सिंह ही नहीं झेल रहे, उनके गांव जिंदबड़ी से लगते भनाम, प्लासी सिंघपुर, बेला रामगढ़ और पत्ती टेक सिंह गांवों के 1000 से ज्यादा परिवार भी इस तरह की दिक्कत उठा रहे हैं। इन गांवों का 15 दिन से शहर से उचित संपर्क नहीं है। पट्टी दुलचियां, पट्टी जीवन सिंह और हरसा बेला अभी भी पानी में डूबे हैं। अब यहां नाव ही लाइफलाइन है। हालात ऐसे हैं कि लोगों के घरों के आंगन और धार्मिक स्थानों के अंदर से सतलुज का पानी 3 से 4 फुट तक तेज बहाव के साथ बह रहा है। न सिर पर छत है और न खाने को भोजन। पानी में हाथ-पैर तक गल गए हैं। दैनिक भास्कर एप की टीम ने इन बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लिया तो समस्याएं सामने आईं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले बाढ़ से जुड़े PHOTOS देखें… ग्रामीणों ने बताया, बाढ़ के हालात में कैसे कट रही जिंदगी… अब पढ़िए सरकारी अफसरों ने हालात पर क्या कहा…. 3 गांव बन गए टापू, नाव ही बनी सहारा
रूपनगर के DC वरजीत वालिया ने बताया कि हरसा बेला के दूरस्थ इलाकों और उपमंडल नंगल के अन्य क्षेत्रों में टीमें पहुंच रही हैं। सतलुज के पानी के प्रवाह के कारण यह क्षेत्र नदी के टापुओं (पट्टी दुलचियां, पट्टी जीवन सिंह और हरसा बेला) में बदल गया है। इसके लिए हमारी पहली टीम दवाइयों और राशन किट से लैस है। इस टीम में एसडीएम नंगल और डिप्टी सीईओ रूपनगर अमित कुमार के साथ-साथ डॉक्टर, पशु डॉक्टर शामिल है। प्रशासन की टीमें लगातार रेत की बोरियां भरकर रख रही हैं, ताकि आपात स्थिति में निपटा जा सके। इसके अलावा जिले के बांधों को मजबूत करने में सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय लोग जुटे हुए हैं। 25 लोगों को रेस्क्यू किया
13 एनडीआरएफ, लाडोवाल (लुधियाना) की टीम इस इलाके में पहुंची है। इंस्पेक्टर लक्ष्मण दास ने बताया कि अभियान के दौरान पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित 25 लोगों को बचाया गया। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सूखा राशन, पानी और दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं। ———————————– घोनेवाल बांध ने डुबोया अमृतसर:15 मिनट में आंखों के सामने जमा-पूंजी बही; 2 गांवों के 520 परिवार सिर पर छत मांग रहे जम्मू-कश्मीर में इस साल तकरीबन 4 बार बादल फटे। औसत से 46 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। इसका सबसे बड़ा असर पंजाब ने झेला। रावी में इतना पानी आया कि 1988 के रिकॉर्ड भी टूट गए। पठानकोट से लेकर फाजिल्का तक पूरी बॉर्डर बेल्ट पानी में डूब गई। (पूरी खबर पढ़ें)

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