आनंद मार्ग के छत्तीसगढ़ सेमिनार में पूंजीवाद पर लेक्चर:आचार्य महादेवानंद बोले- मानवीय मूल्यों को नष्ट करता पूंजीवाद, दूसरे दिन कीर्तन के साथ निकली शोभायात्रा

पूंजीवाद मानवीय मूल्यों को नष्ट करता है और बुद्धिजीवियों को हाई सैलरी, बंगला, गाड़ी देकर मानसिक और आर्थिक रूप से शिकार बना लेता है, ताकि पूंजीवाद के खिलाफ कोई आवाज न उठ सके। समाज में अनैतिक कार्यों को वर्जित किया जाना चाहिए। समाज में तीन प्रकार के परिवर्तन होते हैं, प्राकृतिक, क्रांतिकारी और विप्लवी। आनंद मार्ग के छत्तीसगढ़ राज्य सेमिनार के दूसरे दिन पूंजीवादी व्यवस्था पर लेक्चर में आचार्य महादेवानंद अवधूत ने ये बातें कहीं। सेमिनार में ​​​​​​​वैश्विक नवनिर्माण के लिए नए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकल्प (प्रऊत) दर्शन पर आचार्य ने मुख्य वक्ता के तौर पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, किसी भी राष्ट्र में बुनियादी बदलाव के लिए पूंजीवादी समाज व्यवस्था में इच्छा शक्ति का अभाव होता है। उनकी प्राथमिकता नैसर्गिक संसाधनों के दोहन और निजी स्वार्थों की पूर्ति होती है। निर्धन और निम्न वर्ग के लोग शराब और मुफ्त सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं। ये न तो समाज में बदलाव ला सकते हैं और न ही सरकार या शासन व्यवस्था को कोई खतरा पैदा करते हैं। मानवीय मूल्यों की रक्षा करने वाले आध्यात्मिक जनमानस ही राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए समर्पित होते हैं, इसलिए शासक वर्ग और व्यवस्था इन्हें अपना शत्रु मानती है। आचार्य ने यह भी कहा कि विश्व के हर हिस्से में कृषि अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति में स्थानीय लोगों को उत्पादकता का अधिकार मिलना चाहिए। स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में बाहरी लोगों का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। सेमिनार के दूसरे दिन प्रभात फेरी, ध्वजवंदना आनंद मार्ग स्कूल बैरन बाजार में 31 जनवरी से 2 फरवरी तक आयोजित राज्य सेमिनार के दूसरे दिन गुरु सकाश, पांचजन्य, प्रभात फेरी, ध्वजवंदना और सामूहिक साधना का आयोजन हुआ। विशिष्ट व्याख्यान के दो सत्रों में प्रऊत दर्शन और मानव जीवन में सेवा कार्य पर ध्यान केंद्रित किया गया। बाबा श्रीश्री आनंद मूर्ति जी ने भक्ति के साथ सेवा कार्य का दिया मंत्र समाज सेवा के विभिन्न पहलुओं पर आचार्य महादेवानंद और आचार्य अर्पितानंद अवधूत ने धर्मनिष्ठ मार्गियों को विस्तार से समझाया। बाबा श्रीश्री आनंद मूर्ति जी ने परमात्मा को खुश करने के लिए भक्ति के साथ सेवा कार्य का मंत्र दिया है। उन्होंने मनुष्यों की सेवा के चार प्रकार बताए – शुद्रोचित, क्षत्रियोचित, विप्रोचित और वैश्यौचित सेवा। ब्रह्म भाव से मनुष्य परम तत्व तक पहुंच सकता है, इसी तरह सेवाभाव से भी वह ईश्वर की प्राप्ति कर सकता है। सेमिनार में आनंद मार्ग के वरिष्ठ आचार्य गण रितेश्वरानंद अवधूत, मननात्मानंद अवधूत, उत्यागानंद अवधूत, चितशिवानंद अवधूत, दीदी आनंद सूचिलेखा, आचार्य एच.एल ब्रोकर, सी.एल दासे, भुक्ति प्रधान चन्द्रशेखर चन्द्राकर, डॉ. सत्यजीत साहू, छत्तीसगढ़ समाज अध्यक्ष सुबोध देव, महिला समाज अध्यक्ष मालती परगनिहा और संगीता पोमल सहित 100 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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