आनी में लकड़ी के पुल से पार कर रहे नदी:9 महीने बाद भी लोग जान जोखिम में डाल कर जा रहे, MLA देखने पहुंचे

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के आनी विधानसभा क्षेत्र के निरमण्ड क्षेत्र में पिछले साल आई बाढ़ के 9 महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। आनी के विधायक लोकेंद्र कुमार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। चायल और जवागी पंचायतों के तिंदर, जवागी, सिंहगाड, धाराबाग, प्रांगचा और ओडीधार गांवों के लोग अभी भी ग्रामीणों द्वारा बनाई गई लकड़ी की अस्थायी पुलिया का उपयोग करने को मजबूर हैं। हर दिन 175 स्कूली बच्चों समेत सैकड़ों ग्रामीण इस खतरनाक पुल से गुजरते हैं। विधायक ने बताया कि यह वही क्षेत्र है जहां प्रसिद्ध श्रीखंड महादेव यात्रा का बेस कैंप बनता है। यात्रा शुरू होने में सिर्फ दो महीने बचे हैं, लेकिन अभी तक रास्तों की मरम्मत नहीं हुई है। उन्होंने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया है। विधायक के अनुसार, समेज और बागीपुल में 7 लाख के बजाय मात्र 20 हजार और 50 हजार रुपए का मुआवजा दिया गया। जबकि पड़ोसी शिमला जिले में पूरा मुआवजा वितरित किया गया। लोकेंद्र कुमार ने मांग की है कि सरकार इस मामले की जांच करे और 31 जुलाई की रात को आई आपदा से हुए नुकसान की भरपाई करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार संवेदनशील होने का दावा करती है, लेकिन अभी तक एक पुलिया तक नहीं बना पाई है।

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