नगर निगम चुनाव संपन्न हो गए हैं और अब निगम हाउस गठित करने के लिए जोर आजमाइश शुरू हो गई है। चूंकि निगम सीधे नगर की जनता से जुड़ा होता है इसलिए इसकी गठन प्रक्रिया जानना हरेक के लिए जरूरी है। पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी कहते हैं कि हाउस का गठन घोषित नतीजे के एक महीने के भीतर करना होता है। इस तिथि के दरमियां डिविजनल कमिश्नर की मौजूदगी में इजलास होता है और उसकी देखरेख में सारी प्रक्रिया संपन्न होती है। बख्शी के मुताबिक मेयर के लिए एक व्यक्ति नाम परपोज करता है और आगे दो लोग उसका समर्थन करते हैं। अगर अन्य कोई इस पर एतराज नहीं जताता है तो सर्वसम्मति से मेयर का चुनाव हो जाता है और फिर मेयर सीनियर डिप्टी मेयर फिर डिप्टी मेयर का चयन करता है। खैर, अगर किसी ने एतराज उठा दिया तो डिविजनल कमिश्नर हाथ खड़े करवा कर या फिर पर्ची सिस्टम से चुनाव करवाता है। उक्त तीन वरिष्ठ नेताओं और पार्षदों की सैलरी के बारे में बख्शी बताते हैं कि उनके समय में मेयर को 50 हजार, सीनियर डिप्टी मेयर को 47 हजार और डिप्टी मेयर को 40 हजार सैलरी मिलती थी। मेयर को अपने घर पर दफ्तर बनाने के लिए 10 लाख भी मिलते हैं। रही पार्षदों की बात तो उनको प्रति माह 17 हजार सैलरी मिलती है। निकाय चुनाव में मेयर व पार्षदों के नाम राजपत्र में शामिल करने के लिए भेजे गए हैं। मंगलवार को यह राजपत्र में शामिल होगा। इसकी कॉपी कलेक्टर को मिलने के बाद शपथ ग्रहण की तारीख तय होगी। शपथ ग्रहण के बाद ही निगम में सभापति चुनाव और महापौर परिषद का गठन होगा। नगर के विकास में महापौर और उनकी परिषद के साथ ही सभी पार्षद अहम भूमिका निभाएंगे। शपथ ग्रहण व सभापति के चुनाव के साथ ही यह सिलसिला फिर से प्रारंभ होगा। महापौर व पार्षदों के लिए हर माह मानदेय भी दिया जाता है। साथ ही एमआईसी बैठक में उपस्थित होने पर अलग से राशि दी जाती है। अमृतसर| आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेताओं ने अंदरखाते कांग्रेस और आजाद पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू कर दी है। हर किसी पार्षद को अप्रोच किया जा रहा है, ताकि किसी न किसी तरह कांग्रेस को निगम पर काबिज होने दूर रखा जाए। इन प्रयासों में आप नेता सफल हों या नहीं। मगर यह तय है कि निगम में कांग्रेस को अपना बहुमत साबित करना पड़ेगा। हाउस बनाने के लिए 46 वोटों की दरकार चुनाव में कांग्रेस 40, आम आदमी पार्टी 24, भाजपा 9, अकाली दल 4 और 8 आजाद उम्मीदवार जीते हैं। इस स्थिति में पांचों विधान सभा हलकों के विधायकों को लेकर कुल 90 वोट होते हैं। ऐसे में कांग्रेस को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में बहुमत के लिए 46 हाउस के मेंबरों का वोट चाहिए। चूंकि विधायकों का वोट उसे नहीं मिलेगा ऐसे में 6 वोट और चाहिए। यही कारण है कि अब सारा दारोमदार आजाद जीते 8 उम्मीदवारों पर है। फिलहाल आजाद उम्मीदवार किस ओर करवट बदलते हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन कांग्रेस एक तरफ जहां आजाद पर डोरे डाल रही है वहीं अपने विजेताओं के दल बदलने को लेकर भी डरी हुई है। दूसरी तरफ 5 आजाद पार्षद मौके की तलाश में हैं। वे वेट एंड वॉच मोड में। जिस किसी भी संभावनाएं निगम पर काबिज होने की ज्यादा होंगी वह उसी करवट बैठ जाएंगे। वार्ड-77: सीवरेज जाम भी समस्या: वार्ड 77 में गंदे पानी, सीवरेज जाम और कूड़ा लिफ्टिंग न होने की समस्या है। वार्ड से चुनाव जीते कांग्रेस की पार्षद सुनीता ने कहा कि उन्होंने इस गंदे पानी की सप्लाई और सीवरेज की समस्या को देखते हुए फौरी राहत के तौर पर साफ पानी की मशीन लगवाएंगी। निगम हाउस का गठन होने के बाद समस्या का पक्का करवाया जाएगा। सीवरेज जाम और कूड़े की लिफि्टंग की समस्या के जल्द समाधान आवाज बुलंद करेंगी। वार्ड-37 : सीवरेज पाइप टूटी: वार्ड-37 में मेन बाजार से लेकर पत्ती बलोल सुल्तानविंड तक पुरानी सीवरेज की पाइपें डली हुई थीं, जो जगह-जगह टूटीं। इससे सीवरेज जाम रहा है। आम आदमी पार्टी की पार्षद गुरजीत कौर ने कहा कि पुरानी सीवरेज की पाइपें टूटी है। इनमें बदलवाने के लिए वह नगर निगम के कमिश्नर से मिलेंगी और जल्द ही समस्या का समाधान करवाकर लोगों को राहत दिलाएंगी। प्रयास रहेगा कि एक सप्ताह में ग्राउंड पर हल के प्रयास दिखने लगें। वार्ड 29 : घी मंडी की सड़क खराब: वार्ड-29 में घी मंडी को निकलती सड़क की हालत दयनीय है। सड़क कीचड़ से भरी रहती है। चुनाव जीतें कांग्रेस की श्वेता छाबड़ा ने कहा कि वार्ड के लोगों की समस्या उन्हें याद है । रोड के खराब की स्थिति पर वह काम करेंगे। सड़क को बनावाने को लेकर जल्द प्रयास किए जाएंगे । संजय तिवारी | अमृतसर नगर निगम चुनाव होने के बाद लोगों को अपने-अपने इलाके की समस्या के समाधान की आस पार्षदों से बंध गई है। इसी आस को आगे बढ़ाते हुए दैनिक भास्कर ने शहर के नए पार्षदों को उनकी वार्ड से जुड़ी समस्याएं याद दिलाईं, ताकि लोगों को तुरंत राहत मिल सके। नवनिर्वाचित पार्षदों ने भी भास्कर के प्रयास को आगे बढ़ाते हुए समस्याओं के समाधान के प्रयास करने शुरू कर दिए हैं। ज्यादातर वार्डों में सीवरेज जाम, कूड़ा लिफ्टिंग, टूटी सड़कों की समस्याएं हैं। जिसे लेकर पार्षदों ने हाउस का गठन होते ही तीनों समस्याओं के लिए आवाज उठाकर इन्हें प्राथमिकता के आधार पर हल करने का भरोसा दिया है।


