जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के संविदा कर्मचारियों ने राजस्थान सरकार से न्याय की गुहार लगाई है। संस्थान में पिछले 10-12 वर्षों से कार्यरत ये कर्मचारी पोसमा एजेंसी के माध्यम से सेवाएं दे रहे हैं। संस्थान में प्रतिदिन 1500 से 2000 मरीजों की ओपीडी में जांच की जाती है, जबकि आईपीडी में 250-300 मरीजों का इलाज किया जाता है। यह संस्थान असाध्य रोगों के उपचार के लिए जाना जाता है और राजस्थान में प्रथम स्थान पर है। कर्मचारियों का कहना है कि राजस्थान सरकार की आयुर्वेद विभागीय भर्तियों में सीसीआरएएस और जोधपुर आयुर्वेद विश्वविद्यालय जैसी अन्य सरकारी इकाइयों के कर्मचारियों को बोनस अंक देकर नियुक्ति दी गई है। लेकिन राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित रखा गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि 2013 से 2023 तक की भर्तियों में आयुष मंत्रालय द्वारा उनके साथ अन्याय किया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा आयुर्वेद को बढ़ावा दिए जाने के बावजूद उनकी उपेक्षा की जा रही है। ये सभी कर्मचारी पूरी निष्ठा से आयुर्वेद सेवा में लगे हुए हैं और अब उन्हें भी अन्य संस्थानों की तरह बोनस अंक और नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में कर्मचारियों ने उपमुख्य मंत्री प्रेम चंद बैरवा को पत्र लिखकर भी इस संबंध में मांग की है।


