राज्य के प्राइवेट अस्पतालों में फ्री इलाज का सिस्टम एक बार फिर डगमगा गया है। दिवाली के पहले से ही निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना के तहत इलाज करवाने वाले मरीजों के पैसों का भुगतान नहीं किया गया है। इससे छोटे और मंझोले अस्पतालों की स्थिति ज्यादा बिगड़ गई है। बकाया रकम बढ़ कर लगभग 600 करोड़ हो गई है। खासतौर पर लोन लेकर अस्पताल खोलने वाले प्रबंधन के सामने ईएमआई का संकट खड़ा हो गया है। इस वजह से राजधानी सहित राज्य भर में कई छोटे अस्पतालों ने मरीजों का फ्री इलाज बंद कर दिया है। इससे गरीब मरीजों के लिए दिक्कत शुरू हो गई है। आयुष्मान योजना के तहत जितने मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने पहुंचते हैं, लगभग उतने ही प्राइवेट अस्पताल जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग हर साल औसतन 2500 करोड़ का भुगतान गरीब मरीजों के इलाज के खर्च के तौर पर निजी अस्पतालों को करता है। इसके बावजूद हर चार-पांच माह में निजी अस्पतालों का भुगतान अटक जाता है। इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ता है। इस बार भी लगभग यही स्थिति है। निजी अस्पतालों में मरीजों को हो रही दिक्कतों और प्रबंधन की परेशानी को लेकर भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष विमल चोपड़ा और हॉस्पिटल बोर्ड के चेयरमैन डा. सुरेंद्र शुक्ला कई बार स्वाथ्य विभाग के अफसरों से लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तक से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। रात के समय इमरजेंसी में नहीं मिल रहा फ्री इलाज
प्राइवेट अस्पतालों का भुगतान अटकने से रात के समय इमरजेंसी में मरीजों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। खासतौर पर शहर के आउटर और दूर दराज के इलाकों में तबियत बिगड़ने पर निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना से इलाज नहीं किया जा रहा है। मजबूरी में गरीब परिवार को भी तत्काल इलाज के लिए भुगतान करना पड़ रहा है। इस स्थिति के बारे में भी प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री को जानकारी दी है। पिछले साल भी अटके थे इलाज के 1200 करोड़ रुपए
2024-25 में भी निजी अस्पतालों का करीब 12 सौ करोड़ भुगतान अटक गया था। उस समय चुनाव के कारण दिक्कत आई थी। कांग्रेस शासन काल में जुलाई-अगस्त 2023 से भुगतान नहीं किया जा रहा था। नवंबर में चुनाव हुए। सत्ता परिवर्तन की वजह से पेंच फिर फंसा। उस समय भी कई निजी अस्पतालों ने इलाज बंद कर दिया था। बाद में भुगतान किया गया। अब फिर वही स्थिति पैदा हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री के सामने प्राइवेट अस्पतालों की दिक्कतों को रखा है। मंत्री ने हमें आश्वस्त किया है कि इस माह के अंत तक भुगतान कर दिया जाएगा। बजट का प्रस्ताव वित्त विभाग भेजा है।
डॉ. सुरेंद्र शुक्ला, चेयरमैन, हॉस्पिटल बोर्ड तकनीकी अड़चनों के कारण प्राइवेट अस्पतालों को भुगतान में दिक्कत हो रही है। जल्द ही समस्या दूर कर ली जाएगी। अभी करीब 500-600 करोड़ निजी अस्पतालों का भुगतान रुका है।
– श्याम बिहारी जायसवाल, मंत्री स्वास्थ्य विभाग


