आरटीआई में हुआ खुलासा:80 केंद्रीय विभागों में 9.56 लाख गजटेड और नॉन गजटेड अफसरों के पद खाली

देश के 80 केंद्रीय विभागों में गजटेड और नॉन गजटेड अफसरों के 9.56 लाख पद खाली हैं। इनमें ए ग्रेड ऑफिसर्स के 31694 हजार पद रिक्त हैं। वहीं भारतीय सेना जैसे संवेदनशील विभाग में ही सभी अफसरों को मिलाकर 2.43 लाख पद रिक्त चल रहे हैं। यह जानकारी मध्यप्रदेश के आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रशेखर गौड़ की ओर से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आई है। केंद्र सरकार ने यह सूचना एक मार्च 2023 तक कुल स्वीकृत पदों और वर्तमान में कार्यरत अधिकारियों की दी है। रेलवे, राजस्व और स्वास्थ्य मंत्रालय में भी अधिकारियों की कमी चल रही है। इसके कारण केंद्र सरकार की ओर से लागू की जाने वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कत आ रही है। उधर, इसरो एक के बाद एक नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने जा रहा है। अब इसरो का फोकस चंद्रयान मिशन को और भी आगे लेकर जाने वाला है। जबकि स्पेस में ही ए ग्रेड अधिकारियों के 1251 पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं सभी कैडर को मिलाकर स्पेस मंत्रालय में 3886 पोस्ट वैकेंट चल रही हैं। कोविड में मैनपावर की कमी से पूरा देश जूझ रहा था। अब नॉन कोविड के समय भी केंद्र सरकार इन पदों को नहीं भर रही है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार हेल्थ और फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट में सभी ग्रेड को मिलाकर 7002 पद खाली चल रहे हैं। जबकि आए-दिन सरकार चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई स्कीम्स लॉन्च कर रही है। केंद्रीय कार्यालयों में एक बड़ा विभाग रेलवे का भी है। साल 2024 में कई रेल हादसे हुए। इसे के लिए मानव संसाधन की बड़े पैमाने पर आवश्यकता है। इसके बावजूद रेलवे में 3.16 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी है। रेलवे में ए ग्रेड अधिकारियों के कुल 13153 पद हैं। इसमें से 11138 ही भरे हैं। यह सभी जोन को मिलाकर है। यानी, 2015 ए ग्रेड अधिकारियों की कमी चल रही है। सबसे मजबूत माने जाने वाला गृह मंत्रालय भी अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहा है। विभाग में कुल 1.28 लाख अधिकारियों की कमी चल रही है। 5361 ए ग्रेड अधिकारियों की कमी चल रही है। UPSC में कर्मचारी कम हैं, फिर भी बेहतर काम
यूपीएससी में ए ग्रेड अफसरों के 232 में से 182 पद ही भरे हैं। वहीं ग्रेड-बी अधिकारियों के कुल स्वीकृत पद 272 है। जबकि मार्च 2023 तक 169 कार्यरत थे। ग्रेड बी के 103 ऑफिसर्स की कमी है। यूपीएससी में अधिकारियों कमी होने के बावजूद आयोग की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाओं पर बहुत कम सवाल उठते हैं। यूपीएससी कम मानव संसाधन में भी बेहतर काम कर रहा है। “बढ़ती बेरोजगारी के दौर में यह आंकड़े परेशान करने वाले हैं। सरकारी नौकरी युवाओं का हक है। सरकार मिशन मोड में भर्ती प्रक्रिया शुरू करे। जिस प्रकार लोकसभा एवं विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के पहले ही तय समय में चुनाव करा लिए जाते हैं वैसे ही किसी भी पद के खाली होने के पूर्व ही उन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए तो न तो नौकरी के लिए युवाओं को सड़कों पर आना पड़ेगा और न सरकारी कामकाज प्रभावित होंगे।” -चंद्रशेखर गौड़, आरटीआई कार्यकर्ता

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