आर्मी चीफ और उनकी पत्नी अंगदान करेंगे:बोले- संदेश जाएगा एक सैनिक मृत्यु के बाद भी सेवा में खड़ा; दिल्ली के एक कार्यक्रम में संकल्प लिया

भारत के थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी सुनीता द्विवेदी मृत्यु के बाद अंगदान करेंगे। दिल्ली के एक कार्यक्रम में बुधवार को दोनों ने इसका संकल्प लिया। आर्मी चीफ द्विवेदी ने कहा, सेना का कर्तव्य देश और समाज के कल्याण को प्राथमिकता देने का है। अंगदान इसका एक तरीका है। सेनाध्यक्ष ने कहा, अगर हम अंगदान करते हैं, तो यह समाज के लिए संदेश होगा कि एक सच्चा सैनिक मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा के लिए खड़ा रहता है। कार्यक्रम में आर्मी चीफ ने बताया कि भारत अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) के मामले में दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। यहां हर साल करीब 20000 ऑर्गन ट्रांसप्लांट होते हैं। उपेंद्र द्विवेदी बोले- युवा और सेना के अधिकारी अंगदान का संकल्प लें सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि नेशनल ऑर्गन डोनेशन और एलोकेशन प्रोग्राम में बदलाव किए गए हैं। अब महिला मरीजों और डोनर के परिवार के सदस्यों को अंग मिलने में प्राथमिकता दी जाएगी। यह एक अच्छी पहल है, जिससे अंगदान को बढ़ावा मिलेगा। मैं युवाओं और सेना के अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे अंगदान का संकल्प लें। आइए हम सब मिलकर अंगदान का संदेश फैलाएं और इसे एक राष्ट्रीय अभियान बनाएं। 13 अगस्त: वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे मनाया जाता है दुनियाभर में हर साल 13 अगस्त को ‘वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे’ मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को अंगदान (Organ Donation) के महत्व के प्रति जागरूक करना और यह समझाना है कि कैसे एक व्यक्ति की पहल कई जिंदगियों को नई सांसें दे सकती है। भारत में हर साल लाखों लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें लिवर, किडनी, हार्ट या आंखों जैसे अंगों की सख्त जरूरत होती है, लेकिन समय पर डोनर न मिलने के कारण उनकी जान चली जाती है। जबकि एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंग करीब 8 लोगों की जान बचा सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें… जानिए ऑर्गन डोनेशन क्या है? जब हमारे शरीर का कोई अंग खराब हो जाता है और वो काम करना बंद कर देता है, तब उस अंग की जगह किसी दूसरे व्यक्ति का स्वस्थ अंग लगाया जाता है। इसे ऑर्गन ट्रांसप्लांट कहते हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने शरीर का अंग किसी जरूरतमंद को देता है तो उसे अंगदान (ऑर्गन डोनेशन) कहते हैं।

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