आर्य समाज के पदाधिकारियों ने आर्य समाज मन्दिर ट्रस्ट के लोगों पर आदेशों की अवहेलना कर आर्य समाज भवन का ताला चोरी-छुपे खोलकर समाज से जुड़े पुराने दस्तावेज गायब करने का आरोप लगाया है। साथ ही यथास्थिति बनाए रखने के आदेश होने के बावजूद आर्य समाज भवन का ताला खोल कर इसके प्रांगण में खुले आम हवन का आयोजन करने का आरोप भी लगाते हुए कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। इस संबंध में आर्य समाज के पदाधिकारियों ने सोमवार को प्रधान सुरेन्द्र बेनीवाल के नेतृत्व में उपखण्ड मजिस्ट्रेट के नाम टाउन पुलिस थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। आर्य समाज के प्रधान सुरेन्द्र बेनीवाल ने कहा कि आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान के नियंत्रण में कार्यरत आर्य समाज की नवगठित कार्यकारिणी की ओर से 2 दिसम्बर 2024 को जिला कलेक्टर को ज्ञापन प्रस्तुत कर निवर्तमान कार्यकारिणी से आर्य समाज के भवन का ताला खुलवाने एवं दस्तावेज दिलवाने की मांग की गई थी। इसी संदर्भ में 6 दिसम्बर 24 एवं 7 दिसम्बर 24 को उपखण्ड अधिकारी की अध्यक्षता में टाउन पुलिस थाना में नवगठित कार्यकारिणी के प्रतिनिधियों एवं तथाकथित आर्य समाज मन्दिर ट्रस्ट के नाम पर दावा करने वाले लोगों के बीच बैठक आयोजित की गई। इसमें उपखण्ड अधिकारी की ओर से दोनों पक्षों को यथास्थिति रखने के निर्देश दिए गए। नवगठित कार्यकारिणी की ओर से तब से लेकर आज तक उपखण्ड मजिस्ट्रेट के हर निर्देशों की पालना की गई है परन्तु आर्य समाज मन्दिर ट्रस्ट के नाम से आर्य समाज भवन पर कब्जा जमाए बैठे लोग न केवल उपखण्ड मजिस्ट्रेट के निर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं बल्कि कानून व्यवस्था को भी अंगूठा दिखा रहे हैं। इन लोगों की ओर से आर्य समाज भवन का ताला चोरी छुपे खोल कर आर्य समाज से जुड़े पुराने दस्तावेज गायब किए जा रहे हैं। यही नहीं 5 जनवरी को दोपहर लगभग 2 बजे आर्य समाज भवन का ताला खोल कर इसके प्रांगण में खुले आम हवन का आयोजन किया गया। बेनीवाल के अनुसार नवगठित कार्यकारिणी की ओर से आर्य समाज भवन के स्वामित्व के संबंध में उपखण्ड मजिस्ट्रेट को 112 पेज के दस्तावेज वर्ष 1980 से लेकर 2024 तक के सुपुर्द किए गए हैं जो इस बात का पुख्ता प्रमाण दे रहे हैं कि आर्य समाज भवन एवं इसकी दुकानें आर्य समाज की हैं न कि तथाकथित आर्य समाज मन्दिर ट्रस्ट की सम्पति है। इतने सुस्पष्ट एवं पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत करने के बाद भी उपखण्ड मजिस्ट्रेट की ओर से कोई फैसला नहीं किया जा रहा जबकि तथाकथित मन्दिर ट्रस्ट के पास अपने ट्रस्ट के पंजीयन प्रमाण पत्र एवं विधान नियमावली के अलावा कोई भी ऐसा दस्तावेज नहीं हैं जिससे यह साबित होता है कि आर्य समाज भवन एवं उसकी दुकानें आर्य समाज की नहीं। इससे यह प्रतीत होता है कि नवगठित कार्यकारिणी की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की कोई अहमियत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर उपखण्ड मजिस्ट्रेट को लगता है कि नवगठित कार्यकारिणी की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी हैं तो वे उन्हें आदेश दें ताकि वे अपना दावा छोड़ दें। इससे उनके क्षेत्राधिकार में शान्ति व्यवस्था बनी रहे। अगर उन्हें यह लगता है कि आर्य समाज की नवगठित कार्यकारिणी की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज सही हैं तो वे तत्काल आर्य समाज भवन का ताला खुलवाते हुए तथा कथित आर्य समाज मन्दिर ट्रस्ट के लोगों के खिलाफ 5 जनवरी को किए गए कृत्य के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई करें ताकि क्षेत्र में शान्ति व्यवस्था बनी रहे।


