नियमित करने, मानदेय बढ़ाने समेत 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार को आशा सहयोगिनियों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। उसके बाद कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया गया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आंगनबाड़ी पाठशाला पर कार्यरत आशा सहयोगिनियों की मांगे अभी भी अधूरी हैं। लंबे समय से अल्प मानदेय में जनहित का कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक भी मेहनत के मुकाबले न तो मानदेय मिल रहा है और ना ही अन्य लाभ मिला है। जिलाध्यक्ष रेखा ने बताया कि सरकार ने मांगे नहीं मानी तो आगे बड़े आंदोलन की रणनीति संगठन के उच्च पदाधिकारियों से चर्चा कर तय किया जायेगा। यह है प्रमुख मांगें 1. नियमित सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। 2. मासिक मानदेय 816 रुपए प्रतिदिन की दर से 4959 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 23,700 प्रतिमाह किया जाए। 3. अनुभव एवं योग्यता के आधार पर पदोन्नत कर एएनएम का दर्जा दिया जाए। आशा पर्यवेक्षक एवं नर्सिंग प्रशिक्षण भर्ती प्रक्रिया में 50 प्रतिशत सीटें आशा सहयोगिनियों के लिए आरक्षित की जाए। 4. सेवानिवृति या आकस्मिक मृत्यु पर भरण पोषण के लिए सहायता पैकेज एक मुश्त राशि 11 लाख रुपए, मासिक पेंशन एवं परिवार की किसी भी आश्रित महिला को आशा सहयोगिनी बनाया जाए। 5. आशा सॉफ्ट में दर्ज सभी गतिविधियों पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर तीन गुना किया जाए तथा अन्य ऑफ लाइन कार्य पर भी पारिश्रमिक राशि दी जाए। 6. किसी भी प्राइवेट अस्पताल में संस्थागत प्रसव पर प्रोत्साहन राशि दी जाए। 7. आशा सॉफ्ट में दर्ज देय प्रोत्साहन राशि गतिविधियों के अतिरिक्त अन्य कार्य जैसे आभा कार्ड, आयुष्मान कार्ड, ई-केवाईसी एवं सर्वे आदि कराने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों एवं प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों द्वारा लिखित कार्यालय आदेश दिया जाए तथा अतिरिक्त कार्य कराने पर अन्य गतिविधियों की भांति समान अनुपात में प्रोत्साहन राशि दी जाए। 8. ऑनलाइन कार्य करने के लिए नया टेबलेट स्मार्टफोन दिया जाए। 9. ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश 10-10 दिवस तथा वार्षिक देय आकस्मिक अवकाश 20 दिवस नहीं लेने पर मासिक मानदेय के अनुपात में भुगतान किया जाए। 10. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अथवा कर्मचारियों द्वारा मौखिक अनर्गल मानसिक दबाव बनाने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि आशा सहयोगिनियां अनर्गल दबाव एवं मानसिक तनाव से मुक्त हो सके। 11. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य किसी विभाग का कार्य नहीं करवाया जाए।


