आशीष-परमवीर को हौसला दे रहे गलाडा अफसर, कैफे से उम्मीद

गलाडा परिसर में हाल ही में शुरू हुआ स्पाइस कैफे अब सिर्फ चाय–कॉफी या खाने की जगह नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों के लिए आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक रोजगार का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है। इस अनोखी पहल में गलाडा के अधिकारी ही नहीं, बल्कि पूरा स्टाफ दिल से जुड़कर दिव्यांग बच्चों की मदद में आगे आया है। गलाडा के एसीए तेजस्वी ओजस्वी और एस्टेट ऑफिसर अमन गुप्ता ने बताया कि करीब 10 लाख रुपये की लागत से यह कैफे तैयार किया गया है। इसकी खास बात यह है कि अब जब भी कोई कर्मचारी फ्री होता है, वह कैफे में बैठकर पब्लिक डीलिंग करता है, साथ ही चाय–कॉफी का आनंद भी लेता है। इससे न केवल काम का माहौल सकारात्मक बना है, बल्कि इन दिव्यांग बच्चों को नियमित रोजगार और आत्मविश्वास भी मिल रहा है। एक-दूसरे की मदद , सम्मान से डील वहीं परमवीर, जो बोल तो सकता है लेकिन रुक-रुककर, पूरे आत्मविश्वास से काम कर रहा है। कभी दूसरी मंजिल पर ऑर्डर देता है तो कभी तीसरी मंजिल पर पब्लिक को सर्व करता है। कैफे की एक और खासियत यह है कि यहां खाना पूरी तरह हाइजीनिक, बिना ज्यादा तेल और घी के तैयार किया जा रहा है, जो सभी को बेहद पसंद आ रहा है। एस्टेट ऑफिसर अमन गुप्ता ने कहा कि ऐसा स्वाद और माहौल कहीं और नहीं मिलेगा। उन्हें खुद बेहद पसंद आया। सभी फूड आइटम्स के दाम भी बहुत कम रखे गए हैं। आशीष और परमवीर दोनों दोस्त मिलकर एक-दूसरे की मदद करते हुए, हर ग्राहक से प्यार और सम्मान के साथ डील कर रहे हैं। स्पाइस कैफे आज गलाडा परिसर में यह साबित कर रहा है कि संवेदनशील सोच और सामूहिक सहयोग से दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है स्टाफ के साथ आशीष व परमवीर कर चुके हैं और कैफे में ही भोजन कर रहे हैं। वहीं राजेश कुमार ने कहा कि जब भी पब्लिक उनसे मिलने आती है, तो वह कैफे से ही कॉफी मंगवाते हैं, जिससे बच्चों का हौसला और बढ़ता है। इस कैफे में काम कर रहे आशीष बोल नहीं सकता, लेकिन वह ग्रिल्ड सैंडविच और चाय इतनी स्वादिष्ट बनाता है कि गलाडा के अधिकारी उसके हाथ के बने खाने के मुरीद हो गए हैं। जैसे ही कोई ऑर्डर आता है, आशीष फटाफट डिश तैयार करता है और धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए खुद सर्व करने जाता है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो दिनों से पूरा गलाडा स्टाफ इसी कैफे से खाना, चाय और कॉफी मंगवा रहा है। कर्मचारी भूपिंदर सिंह ने बताया कि अब वह घर से खाना लाना भी बंद

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *