इंटरनेशनल टाइगर वीक में 7 केटेगरी में मिले अवार्ड:बाघ संरक्षण की अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के नए मॉडल्स पर हुई चर्चा

सवाई माधोपुर में चौथे रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक में दूसरे‌ दिन शनिवार देर शाम तक सार्थक चर्चा हुई। यहां विशेषज्ञों ने दूसरे दिन बाघ और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की गई। लिव4फ्रीडम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 4 सत्रों में वन्यजीव संरक्षण में राजस्थान की भूमिका, वन्यजीव आवासों की सुरक्षा, वन्यजीव शिकार के खिलाफ प्रयास और वाइल्ड लाइफ फ़िल्म मेंकिंग पर प्रकाश डाला गया।
इसी के साथ बाघ संरक्षण के लिए अद्वितीय कार्य करने वालों को 7 कैटेगरी में सम्मानित किया गया। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एम.के. रणजीत सिंह झाला को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ और राजसमंद के दिवंगत रेंजर किशोर कुमार समेत 3 को टाइगर वारियर्स अवॉर्ड से नवाज़ा गया। रविवार को टाइगर सफारी के साथ 3 दिवसीय आयोजन का समापन होगा। सत्रों में हुआ सार्थक चिंतन
“थ्रू द लेंस ऑफ द वाइल्ड: भारत में वाइल्डलाइफ फिल्ममेकिंग का उदय” में प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ सिनेमैटोग्राफर सुब्बैया नल्लामुथु और सरिस्का टाइगर फाउंडेशन के संस्थापक-सचिव दिनेश दुर्रानी ने वाइल्डलाइफ फिल्म मेकिंग से जुड़े पहलुओं पर प्रकाश डाला। “राजस्थान: क्राउन ज्वेल ऑफ टाइगर कंजर्वेशन-चुनौतियां और उपलब्धियां” सत्र में पूर्व इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के पी.एस. सोमशेखर और वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के पूर्व निदेशक एवं राजस्थान स्टेट वाइल्डलाइफ एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य डॉ. विनोद बी. माथुर ने चर्चा की। “जंगल से परे: भविष्य के वन्यजीव आवासों की सुरक्षा” सत्र में वर्ल्ड बैंक के सीनियर एनवायर्नमेंटल स्पेशलिस्ट अनुपम जोशी और वर्ल्ड वाइल्ड फण्ड फॉर नेचर-इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया) के सेक्रेटरी जनरल और सीईओ रवि सिंह ने विचार साझा किए। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के चेयरमैन एम.के. रंजीतसिंह झाला और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सीनियर डायरेक्टर डॉ. अमित मल्लिक ने “गार्डियंस ऑफ द वाइल्ड: वाइल्डलाइफ क्राइम और शिकार के खिलाफ नवाचार” विषय पर प्रकाश डाला। वहीं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सीनियर डायरेक्टर डॉ. दीपांकर घोष ने अपनी भूमिका मॉडरेटर के रूप में निभाई। 7 केटेगरी में दिए अवार्ड
रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक के फाउंडर और लिव4फ्रीडम पार्टनर सुनील मंगल ने बताया कि देबमाल्या रॉय चौधरी को ‘कंज़र्वेशनिस्ट अंडर 40’, सतपुड़ा लैंडस्केप टाइगर पार्टनरशिप को ‘इमर्जिंग एनजीओ’, पेरिआर टाइगर रिज़र्व से वन संरक्षक मनू एम जे और आरोमल एम ए व राजसमंद के दिवंगत रेंजर किशोर कुमार को ‘रॉयल रणथंभौर टाइगर वॉरियर्स’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। कैरव इंजीनियर को ‘अनंत बजाज वाइल्डलाइफ फिलंथ्रोपिस्ट’, वहीं जिम कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व को ‘टाइगर रिज़र्व विद लार्जेस्ट टाइगर पॉप्युलेशन’ अवॉर्ड से नवाज़ा गया। मध्य प्रदेश को ‘इंडियन स्टेट विथ द लार्जेस्ट पापुलेशन’ अवॉर्ड दिया गया। बाघ संरक्षण एवं सुरक्षा कानून में अपना अहम योगदान निभाने वाले वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एम.के. रणजीतसिंह झाला को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। 3 दिन में 7 सत्रों में हुई चर्चा
बता दें कि 3 दिवसीय आयोजन में 7 चर्चा सत्रों का आयोजन हुआ। इसी के साथ कार्यक्रम के दौरान डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग, स्कूली बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं और हेल्थ चेकअप कैंप जैसी पहल ने स्थानीय समुदाय को भी जोड़ने का सराहनीय कार्य किया गया।
इस प्रकार, संरक्षण, सहयोग और समुदाय इन तीनों ने रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2025 में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह आयोजन न केवल रणथम्भौर बल्कि पूरे भारत के बाघ अभयारण्यों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बना, जहां विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और सामुदायिक संगठनों ने मिलकर संरक्षण के महत्व पर चर्चा की और नए समाधानों को प्रस्तुत किया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *