इंटरव्यू में पूछा-टोंक को नवाबों की नगरी क्यों कहते हैं?:टोंक के शुभम की 929वीं रैंक; 30 मिनट में किए 20 सवाल

टोंक के शुभम मीणा ने यूपीएससी एग्जाम में 929वीं रैंक हासिल की है। शुभम ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान उनसे टोंक के इतिहास, एग्रीकल्चर और मृत्युदंड से जुड़े सवाल किए गए। शुभम ने बातया कि उनका इंटरव्यू राउंड करीब आधे घंटे तक चला, जिसमें 20 सवाल किए गए। उनसे पूछा गया कि-टोंक को नवाओं की नगरी क्यों कहते हैं ? दरअसल, शुभम टोंक जिले के देवली उपखंड के नासिरदा उप तहसीहल के मानपुरा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने पांचवीं बार में ये सफलता हासिल की है। वे इसका श्रेयउनके दादा पूर्व देवली प्रधान स्वर्गीय रामरतन मीणा और माता पिता को देते हैं। आईआईटी रुड़की से बीटेक की शुभम मीणा ने वर्ष 2020 में आईआईटी रुड़की से पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उनका प्लेसमेंट भी हो गया था। लेकिन, लेकिन उनका सपना था कि वे सिविल सेवा में जाए। ऐसे में प्लेसमेंट मिलने के बाद भी वे यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। शुभम ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने लगातार कड़ी मेहनत की। उन्होंने कई बार परीक्षा दी और पांच बार असफलता का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार इस बार उन्हें सफलता मिल गई। उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन करीब 10 घंटे नियमित पढ़ाई करते और इसकी तैयारी की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा स्वर्गीय रामरतन मीणा (पूर्व प्रधान, देवली) की प्रेरणा को दिया। इसके साथ ही अपने पिता राजेंद्र मीणा, जो शिक्षा विभाग में संस्थापन अधिकारी हैं, और माता कमलेश मीणा (गृहणी) के सहयोग को भी उन्होंने अपनी सफलता का महत्वपूर्ण कारण बताया।
ये पूछे थे प्रमुख सवाल सवाल: टोंक को नवाबों की नगरी क्यों कहा जाता है ? जवाब: टोंक को नवाबों की नगरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह राजस्थान (पुराने राजपूताना) की एकमात्र ऐसी रियासत थी, जहां मुस्लिम नवाबों का शासन रहा था। यहां के नवाबों ने लंबे समय तक शासन किया, इसलिए टोंक को नवाबों की नगरी के नाम से जाना जाता है। सवाल: खेती में क्या आधुनिक प्रयास करेंगे ? जवाब: खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना आवश्यक है। किसानों को नई कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, ड्रिप सिंचाई और मशीनों का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही बाजार की मांग के अनुसार फसल का चयन करना चाहिए, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके। साथ ही कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करना भी जरूरी है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। सवाल: क्या मृत्यु दंड होना चाहिए या नहीं ? जवाब: मृत्यु दंड का प्रयोग केवल “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (अत्यंत दुर्लभ) मामलों में ही किया जाना चाहिए। सामान्य मामलों में आजीवन कारावास (लाइफ सेंटेंस) का प्रावधान अधिक उपयुक्त माना जाता है। इससे न्याय भी बना रहता है और मानवता के सिद्धांतों का भी ध्यान रखा जा सकता है। इनपुट:महेंद्र धाकड़, नासिरदा

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