इंदौर के किन्नर विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। नंदलालपुरा के किन्नरों पर आरोप लगाने वाली करिश्मा किन्नर ने अपनी शिकायत वापस ले ली है। करिश्मा का कहना है कि उसे भड़काया गया था और नंदलालपुरा गुट पर झूठे आरोप लगाने के लिए दबाव बनाया गया। करिश्मा ने कमिश्नर सहित कई अधिकारियों को लिखित बयान देकर बताया कि उसे डराया-धमकाया गया और बंधक बनाकर किन्नर समाज को बदनाम करने की साजिश रची गई। विजयनगर थाने में करिश्मा ने अपनी पूर्व शिकायत वापस ले ली। साथ ही कमिश्नर को दिए आवेदन में स्पष्ट किया कि नंदलालपुरा के किन्नरों से उसका कोई विवाद नहीं है। उसने बताया कि पहले उसने सपना गुरु और उसके साथियों पर एफआईआर कराई थी। इसके बाद सपना गुरु ने समझौते के बहाने बुलाकर नंदलालपुरा गुट के खिलाफ बयान देने के लिए कहा। यहां तक कि उसकी मां की मौत के बाद भी आरोप उसी गुट पर लगाने के लिए मजबूर किया गया। करिश्मा का आरोप है कि सपना गुरु और अन्य लोगों ने दबाव डालकर उससे यह सब कराया। बिना इलाज छोड़ा, झूठे आरोप लगवाए करिश्मा ने बताया कि वह पिछले दो साल से एचआईवी से पीड़ित है। सपना ने उसे भरोसा दिलाया था कि इंजेक्शन और इलाज की आड़ में नंदलालपुरा के किन्नरों पर आरोप लगाए जाएं। बदले में उसके उपचार की जिम्मेदारी लेने का वादा किया गया। लेकिन काम निकल जाने के बाद सपना और उसके साथियों ने उसे पूरी तरह अकेला छोड़ दिया। इलाज करवाने की उम्मीद खत्म होने पर करिश्मा ने नंदलालपुरा के किन्नरों से मदद मांगी, जिसके बाद उसका उपचार फिर से शुरू हो पाया। करिश्मा ने साफ कहा कि उसे एचआईवी किसी मित्र के साथ संबंध बनाने के दौरान हुआ था, इसमें नंदलालपुरा के किन्नरों का कोई हाथ नहीं है। उन पर लगाए गए सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत थे।


