इंदौर के गोपाल मंदिर में हुई शादियों की होगी जांच:मांगलिक काम के नाम पर नियमों का उल्लंघन; कमिश्नर बोले- नई गाइडलाइन बनाएंगे

इंदौर के प्राचीन गोपाल मंदिर में शाही शादी की अनुमति देने के मामले में मंदिर के मैनेजर केएल कौशल को बर्खास्त कर दिया गया है। कमिश्नर दीपक सिंह ने इस मामले में डिप्टी कलेक्टर विनोद राठौर को भी प्रभारी पद से हटाकर जिला कलेक्ट्रेट में अटैच किया है। राठौर का प्रभार खुडै़ल एसडीएम गोपाल वर्मा को सौंपा गया है। जांच में पुरानी तारीखों में दी गई शादी की अनुमतियों की भी पड़ताल कराने की सिफारिश की गई है। अब तक की जांच के दौरान सामने आया है कि मंदिर में 10-15 लोगों के मांगलिक कार्य- बच्चों के नामकरण, जनेऊ, शादी आदि के लिए एक हजार रुपए तक किराया लिया जाता है। लेकिन जिस शाही शादी को लेकर सारी कार्रवाई हुई है, उसके लिए 25 हजार रुपए लेकर अनुमति दी गई थी। शादी वाले दिन जब लोगों को जानकारी लगी और आपत्तियां आईं तो मंदिर मैनेजर ने तुरंत 75 हजार रुपए कैश जमा करा लिए। ये रुपए बैंक में जमा भी नहीं कराए गए थे। इसके अलावा पहले हुए आयोजनों की राशि भी समिति के बैंक खाते में जमा नहीं कराई गई है। कमिश्नर दीपक सिंह ने कहा- गोपाल मंदिर की व्यवस्था और संचालन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति मंदिर संचालन से जुड़े बिंदुओं पर नई गाइडलाइन तैयार करेगी। मांगलिक अनुमति के नाम पर नियमों का उल्लंघन किया
बता दें कि 12 जनवरी को इंदौर में करीब 190 साल पुराने श्री गोपाल मंदिर में एक परिवार ने शादी समारोह आयोजित किया। इसमें मांगलिक अनुमति के नाम पर नियमों का उल्लंघन किया गया। शादी के लिए गर्भगृह के सामने हवन कुंड बनाया गया। मेहमानों को शाही बर्तनों में भोजन परोसा गया। इस दौरान मंदिर परिसर में गंदगी फैल गई। मंदिर में फूलों से सजावट की गई। गलियारों में सोफे और कुर्सियां लगाई गईं। चौंकाने वाली बात यह रही कि भोजन की तैयारी मंदिर परिसर में ही हुई। फूड स्टॉल्स और टेंट लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया। इससे यातायात भी प्रभावित हुआ। कारोबारी ने 25 हजार में किराए पर लिया था
शहर के कारोबारी राजकुमार अग्रवाल ने बेटे की शादी के लिए केवल 25 हजार रुपए की रसीद कटवाकर गोपाल मंदिर को किराए पर लिया था। प्रबंधन को उसने बताया था कि शादी हो चुकी है। यहां केवल आशीर्वाद लेने और भोजन प्रसादी बांटने की योजना है। इसके बाद दो दिन तक मंदिर में सजावट और मेहमानों के स्वागत की भव्य तैयारियां हुईं। मंदिर के अंदर और बाहर रेड कार्पेट बिछाए गए। स्टेज लगाया गया। डीजे की धुनों पर गीत बजते रहे। इस दौरान दर्शन के लिए आए भक्तों को भी रोका गया। 29 जुलाई 2024 को दी थी शादी की अनुमति
कलेक्टर आशीष सिंह ने 24 घंटे में मामले की जांच कराई। मंदिर मैनेजर केएल कौशल, डिप्टी कलेक्टर विनोद राठौर, पुजारी बालमुकुंद पाराशर और कारोबारी राजकुमार अग्रवाल के बयान लिए गए। इसके अलावा शादी से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य जुटाए गए। मैनेजर कौशल के बयान से खुलासा हुआ कि इस शाही शादी के लिए 29 जुलाई 2024 को ही अनुमति दे दी गई थी। इसके एवज में 25,551 रुपए जमा करवाकर रसीद दी गई थी। कौशल ने पहले यह बताया कि उन्होंने राजकुमार अग्रवाल से 6 जनवरी 2025 को दूसरी बार 75 हजार रुपए लिए थे। उनका कहना था कि उन्होंने इसके लिए डिप्टी कलेक्टर राठौर से मौखिक रूप से अनुमति ले ली गई थी। कौशल ने यह भी बताया कि कार्यक्रम में करीब 200 लोग शामिल हुए थे। इसके लिए 10 जनवरी से ही मंदिर परिसर की साफ-सफाई शुरू हो गई थी। 11 जनवरी को शाही सजावट की गई। 12 जनवरी को शादी और रिसेप्शन हुआ। शाम 4 बजे तक पूरा कार्यक्रम निपट गया था। कौशल का कहना था कि इस दौरान भक्तों को कोई परेशानी नहीं हुई। चेक लौटाकर मैनेजर ने 75 हजार रुपए नकद लिए
जांच के दौरान कौशल ने बताया कि 75 हजार रुपए की राशि विवाह वाले दिन 12 जनवरी को जमा कराई गई थी। इसके लिए अग्रवाल ने चेक दिया था, जिसे लौटाकर हाथों-हाथ कैश राशि ली गई। उस राशि को बैंक में जमा नहीं कराया जा सका था। मंदिर के पुजारी बालमुकुंद पाराशर ने बताया कि पूरे विधि विधान के साथ विवाह कराया गया। भगवान को 56 भोग लगाने के बाद मेहमानों का भोजन हुआ। पाराशर का कहना था कि शादी के दौरान भक्तों को कोई परेशानी नहीं हुई। कार्यक्रम 5 बजे खत्म हो गया था। गोपाल मंदिर में बेटे की शादी कराने वाले राजकुमार अग्रवाल का कहना था कि उन्होंने कुल एक लाख 51 हजार रुपए जमा कराए थे। डिप्टी कलेक्टर बोले- शादी रोकने के लिए कहा था
मामले में डिप्टी कलेक्टर विनोद राठौर ने बताया कि उन्हें शादी वाले दिन सुबह सूचना मिली तो उन्होंने मंदिर मैनेजर कौशल से मोबाइल पर बात की। वे मंदिर में नहीं थे। राठौर ने कहा- मैंने राजकुमार अग्रवाल से बात कर कार्यक्रम पर आपत्ति ली थी। शादी को तत्काल रोकने को कहा। मैनेजर कौशल मंदिर पहुंचे, तब तक कार्यक्रम हो चुका था। इन शादियों की अनुमतियां भी जांच के घेरे में
जांच में यह भी पता चला है कि गोपाल मंदिर में पहले भी इसी तरह विवाह के लिए अनुमतियां दी गई थीं। 25 अप्रैल 2024 को प्रद्युम्न परिवार को 1 हजार रुपए में शादी की परमिशन दी तो 29 जुलाई 2024 को विनय और मयंक नाम के व्यक्तियों को एक हजार रुपए और 500 रुपए में अनुमति दी गई थी। इन शर्तों और नियमों की उड़ाईं धज्जियां आर्थिक घोटाले की अलग से जांच की सिफारिश
प्राथमिक जांच में साबित हुआ है कि अग्रवाल फैमिली का कार्यक्रम मंदिर की गरिमा के अनुसार नहीं होकर निजी और भव्य शादी समारोह था। इसके लिए डिप्टी कलेक्टर विनोद राठौर ने सिर्फ मौखिक अनुमति दी थी। इसे तुरंत रोका जा सकता था लेकिन नहीं रोका गया। खास बात यह है कि मंदिर के लेजर बुक, कैश बुक और रसीद कट्‌टे की भी जांच की गई थी। इसमें पता चला कि कई रसीदों की राशि अब तक बैंक में जमा नहीं कराई गई है। इसकी अलग से जांच कराने की सिफारिश की गई है। अग्रवाल बोले- संस्कृति को बचाना उद्देश्य
मामले में ‘दैनिक भास्कर’ ने कारोबारी राजकुमार अग्रवाल से भी बात की। उन्होंने कहा कि मेरा उद्देश्य पैसे बचाना नहीं था। मंदिर में शादी करने का मकसद अपनी संस्कृति को बचाना है। मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चों को धार्मिक संस्कार मिलें। मैंने इसके लिए मंदिर प्रबंधन के माध्यम से पहले 25 हजार और फिर 75 हजार रुपए जमा कर रसीद ली थी। यह पेमेंट कमिश्नर ऑफिस के जरिए किया। शादी में बमुश्किल सौ लोग शामिल हुए थे। मंदिर में पहले भी अन्य लोग शादी करवा चुके हैं। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… शादी के लिए मंदिर किराए पर दिया, मैनेजर बर्खास्त इंदौर में करीब 190 साल पुराने श्री गोपाल मंदिर में रविवार को एक परिवार ने शादी समारोह आयोजित किया। इसमें मांगलिक अनुमति के नाम पर नियमों का उल्लंघन किया गया। शादी के लिए गर्भगृह के सामने हवन कुंड बनाया गया और मेहमानों को शाही बर्तनों में भोजन परोसा गया। इस दौरान मंदिर परिसर में गंदगी फैल गई। पढ़ें पूरी खबर…

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