इंदौर के राजवाड़ा पर भगवान विष्णु के दर्शन:24 करोड़ की लागत से बनी पंचधातु की प्रतिमा; महापौर बोले- शहादा में दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर होगा

राजवाड़ा में भगवान विष्णुजी की प्रतिमा भक्तों के दर्शन के लिए रखी गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। कई भक्त तुलसी दल लेकर भगवान को अर्पित करने के लिए पहुंचे हैं। भक्त लाइन लगाकर भगवान की प्रतिमा के दर्शन कर रहे हैं, जबकि पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण किया जा रहा है। करीब ढ़ाई घंटे भगवान की शेषशायी प्रतिमा राजवाड़ा पर रहेगी। प्रतिमा यहां से महाराष्ट्र के शहादा रवाना होगी। वहां पर भगवान का मंदिर बनाया जा रहा है, जहां ये प्रतिमा विराजित होगी। पंच धातु की यह प्रतिमा 24 करोड़ की है। इसे तैयार होने में ही साढ़े चार साल का समय लगा। महापौर बोले- शहादा में बनेगा सबसे बड़ा मंदिर महापौर पुष्यमित्र भार्गव भगवान विष्णुजी के दर्शन करने राजवाड़ा पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह इंदौर के लिए गर्व की बात है कि भगवान की प्रतिमा यहां से बनकर महाराष्ट्र के शहादा जाएगी, जहां उनकी प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। महापौर ने यह भी कहा कि यह मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा होगा और पूरा इंदौर इस यात्रा के लिए खुश है। मंत्री विजयवर्गीय भगवान के दर्शन करने पहुंचे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी भगवान विष्णु के दर्शन करने राजवाड़ा पहुंचे, इस दौरान उन्होंने कहा कि ऐसे दर्शन मैंने भी पहले बार किए हैं, हमारे शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि कलयुग के बाद कलकी भगवान का अवतार होगा और वे भगवान विष्णु के दर्शन करेंगे। 21 टन वजनी है भगवान की प्रतिमा
भगवान विष्णु की प्रतिमा 11 फीट लंबी है। पंचधातु से इसे तैयार किया है। जिसका वजन 21 टन है। पंच धातु की यह प्रतिमा मध्यप्रदेश और राजस्थान में तैयार हुई है। श्री नारायण भक्ति पंथ के प्रमुख लोकेशानंद महाराज से दैनिक भास्कर ने चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा पंचधातु की है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि मिट्टी की प्रतिमा का पूजा का एक गुना फल मिलता है। कांस्य की प्रतिमा की पूजा का दस गुना फल प्राप्त होता है। पाषाण की प्रतिमा का सौ गुना फल मिलता है, लेकिन धातु की जो प्रतिमा होती है उसकी पूजा का अनंत गुना फल मिलता है। कलयुग में लोगों के पास इतना समय नहीं है कि वह अनंत गुना फल के लिए अनंत गुना प्रयत्न करता रहे। भगवान का ये स्वरूप इसलिए पंचधातु में बनाया है, ताकि भक्तों को बहुत शीघ्र फल प्रदान हो। प्रतिमा का तीन से चार भागों में निर्माण हुआ है। सालभर मिट्टी में काम किया, साढ़े चार साल लगे तैयार होने में
उन्होंने बताया पहले मिट्टी में एक मॉडल तैयार किया गया। यह पुरुषोत्तम नारायण के स्वरूप में है। यह काफी सुंदर प्रतिमा है। एक साल तो मिट्टी में ही इसका काम किया। प्रतिमा का स्वरुप तैयार हुआ। फिर फायबर में मॉडल बनाया। इसके बाद जयपुर में इसकी कास्टिंग की गई। देखा जाए तो मुख्य रूप से मध्यप्रदेश और राजस्थान में इसका मुख्य काम हुआ है। कास्टिंग होने के बाद प्रतिमा यहां आई। यहां भी ढ़ाई सालों तक प्रतिमा की फीनिशिंग का काम किया गया। करीब साढ़े चार साल में ये प्रतिमाएं बनकर तैयार हुई है। इस प्रतिमा की लागत 24 करोड़ रुपए है। जन सहयोग से यह प्रतिमा तैयार हुई है। ये है प्रतिमाओं की ख़ासियत
महाराज ने बताया कि प्रतिमा में ब्रह्मा-विष्णु-महेश तीनों है। नारायण एक पुष्प से भगवान महादेव का पूजन कर रहे है। ब्रह्मा जी उनकी नाभी में है। भगवान के शीश की तरफ शेषनाग है। यह लक्ष्मीकांत भगवान है, उनकी चरणों में माता लक्ष्मी की प्रतिमा विराजमान है। भगवान की प्रतिमा के समक्ष गरुड़ जी की प्रतिमा है। गरुड़ जी की यह प्रतिमा भी काफी दिव्य है। गुरुड़ जी भगवान के नित्य सेवक है। उनकी दृष्टि भगवान की तरफ है। गरुड़ जी की प्रतिमा में अष्ट नाग है। इसमें से एक ही नाग, गरुड़ जी की आंखों में देख रहा है। वह उनके भावों और विचारों को पड़ता है कि गरुड़ की कहां जाने वाले है। ये सातों नागों को दिशा-निर्देश देते है। दर्शन को आएं तो एक तुलसी दल साथ लाएं
महाराज ने भक्तों से एक तुलसी दल साथ लाने को कहा है। उनका कहना है कि भगवान श्रीनारायण को तुलसी का पौधा अति प्रिय हैं भगवान इससे ही प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों की सारी मनोकामना पूर्ण करते हैं। अत: जो भी भक्त इस दिव्य व अलौकिक मूर्ति के दर्शनों को आएं तो अपने घर से एक तुलसी पत्र साथ में लाएं। इंदौर से 235 किमी की यात्रा रहेगी
महाराज ने बताया कि राजवाड़ा पर दर्शन के बाद प्रतिमा राजवाड़ा से गांधी हाल जाएगी। यहां से शहादा के लिए रवाना होगी। इंदौर से शहादा की 235 किलोमीटर की इस यात्रा में अनेक सामाजिक संगठन शामिल होंगे। जिनमें अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, श्री पारीक ब्राह्मण समाज, श्रीपालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी, वेश्य समाज, क्षत्रीय समाज, मराठी समाज, जैन समाज, सिक्ख समाज, सिंधी समाज, पालीवाल समाज, बजरंग मंडल, सीए एसोसिएशन, डॉक्टर्स ग्रुप आदि रहेंगे। 235 किमी की इस यात्रा के दौरान विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों द्वारा रथ यात्रा की अगवानी भी इस दौरान की जाएगी। इन रास्तों से गुजरेगी यात्रा
श्री नारायण भक्ति पंथ से जुड़े मणिकांत गुप्ता, मनीष शर्मा एवं संतोष गर्ग ने बताया कि गुरुवार सुबह 9 से 11 बजे दर्शन पूजन करने के बाद हरि भक्त राजबाड़ा से गांधी हाल तक शोभायात्रा निकालेंगे। इसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होंगे। गांधी हाल से शोभायात्रा शहादा के लिए प्रस्थान करेगी। शोभायात्रा राऊ, महू, मानपुर, ठीकरी, बरुफाटक, जुलवानिया, गुजरी, सेंधवा, निवाली, पानसेमल, खेतिया आदि जगह का भ्रमण कर 11 जनवरी को शहादा नगर पहुंचेंगी। 11 जनवरी को शहादा में विशाल भक्ति महोत्सव मनाया जाएगा। जिसमें सत्संग, भजन, कीर्तन व महापूजा एवं भगवान की विशेष अर्चना संपन्न होगी। वहीं उत्तरायण महापर्व पर 14 जनवरी दोपहर 12 बजे भगवान विष्णु की शेषशायी मूर्ति को गर्भगृह में विराजित किया जाएगा 15 जनवरी को महाप्रसादी का आयोजन होगा।

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