इंदौर के MGM मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की जांच शुरू:कलेक्टर ने गठित की कमेटी; जूनियर ने X पर लिखा- हॉस्टल रावण की लंका जैसा

इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। दैनिक भास्कर द्वारा यह मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद कलेक्टर आशीषसिंह ने जांच समिति गठित की है। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रभारी डीन डॉ. नीलेश दलाल ने स्टूडेंट से चर्चा की। उनके साथ होस्टल वार्डन राजेंद्र मार्को और एंटी रैगिंग कमेटी के प्रमुख डॉ. वीएस पाल भी मौजूद थे। दरअसल 2024 बैच के जूनियर छात्रों ने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से शिकायत की है। छात्रों ने लिखा कि रात 10.30 बजे उन्हें बुलाया व सिर झुकाकर खड़ा कर दिया जाता है। सुबह 5-6 बजे नशा उतरने तक सीनियर उन्हें पीटते हैं। उन्हें 6-6 घंटे तक रूफटॉप पर सिर झुकाकर खड़ा रखा जाता है। आते-जाते पीटते हैं। असहज कपड़ों में छत पर बुलाते हैं। शहर में कहीं रावण की लंका है तो वह कॉलेज का बॉयज हॉस्टल है। जहां सिर्फ सीनियर्स का नियंत्रण है। जानकारी के मुताबिक इन्हीं कारणों से इस वर्ष 30 छात्रों ने हॉस्टल छोड़ दिया है। हालांकि यह रैगिंग कब हुई, सोशल मीडिया पोस्ट पर इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और वार्डन से भी किसी तरह की शिकायत नहीं की गई है। प्रशासन की टीम कॉलेज पहुंची एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रभारी डीन डॉ. नीलेश दलाल ने बताया कि होस्टल में जो भी कमियां हैं उसे दूर करेंगे। हमने तत्काल वार्डन और नोडल अधिकारी की मीटिंग ली है। पीड़ित ने अपनी पहचान छुपाई है। मौके पर कोई आइडेंटिफिकेशन नहीं दिया है। होस्टल में सब स्टूडेंट ठीक हैं। किसी ने नाराजी नहीं जताई। वार्डन और एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक हुई। बच्चों को भी बुलाया। उन्होंने किसी तरह की शिकायत की बात नहीं कही। स्टूडेंट ने हमें बताया कि हम पर किसी तरह का दबाव नहीं है। हमने स्टूडेंट से कहा है कि कोई भी दिक्कत हो तो कहां शिकायत करना है। संबंधितों के नंबर होस्टल में लिखे हैं। बच्चे ने ट्वीटर पर जो डाले हैं, वो पुराने हैं। 20 दिन के पहले होने की आशंका है। पूर्व डीन ने तब भी जांच की थी, पर कुछ नहीं मिला था। वहां सीसीटीवी लगे हैं। हालांकि, एक छात्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए मैं निजी होस्टल में नहीं रह सकता। कॉलेज के हॉस्टल में रहना मेरी मजबूरी है। इसके लिए मुझे रैगिंग का शिकार होना पड़ता है। हालांकि, उसने यह नहीं बताया कि सोशल मीडिया पर फोटो किसने वायरल किए। मामले में Indian Doctor नाम के X अकाउंट से प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मप्र के मुख्यमंत्री को भी शिकायत की गई है। हॉस्टल वॉर्डन राजेंद्र मार्को ने बताया कि- मेरे पास किसी छात्र ने रैगिंग को लेकर कोई शिकायत नहीं की। अब तक जिन छात्रों ने हॉस्टल छोड़ा है उसके कई कारण हैं। इस संबंध में कुछ दिन पहले एक पेरेंट ने फोन किया था। पर उन्होंने न तो अपना नाम बताया और ना ही स्टूडेंट का। इसके बाद हमने चौकसी बढ़ा दी थी। सीनियर छात्रों पर नजर रखी जा रही है। पूर्व डीन संजय दीक्षित ने बताया कि- रिटायरमेंट के पहले मेरे मोबाइल पर शिकायत आई थी। इसके बाद हॉस्टल में एंटी रैगिंग कमेटी बनाई गई थी। लेकिन, जांच के दौरान कमेटी के सामने किसी भी छात्र ने लिखित या मौखिक शिकायत नहीं की।

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