इंदौर से कोटा आ रही नवरंग ट्रेवल्स की एक बस में सफर कर रहे यात्रियों को उस वक्त मौत सामने नजर आई, जब बीच रास्ते बस में तकनीकी खराबियां एक के बाद एक सामने आने लगीं। यह घटना रामगंजमंडी के चेचट इलाके से शुरू हुई, जहां बस अचानक बंद हो गई। यात्रियों के मुताबिक पहले से जर्जर हालत में चल रही बस को चालू करने के लिए ड्राइवर ने यात्रियों से ही धक्का लगवाया। दो-तीन बार प्रयास के बाद भी बस स्टार्ट नहीं हुई, फिर बैटरी बदली गई, तब जाकर बस आगे बढ़ी। बस में सवार यात्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि मंडाना टोल टैक्स पहुंचते ही बस के अंदर से प्लास्टिक जलने जैसी तेज बदबू आने लगी। जब इसकी सूचना ड्राइवर को दी गई तो बस रोकी गई। नीचे उतरते ही यात्रियों ने देखा कि पीछे के दोनों टायरों के बीच से भयंकर धुआं निकल रहा था और आग जैसी स्थिति बन गई थी। ड्राइवर और स्टाफ ने पानी डालकर आग बुझाई, लेकिन तब तक यात्रियों में दहशत फैल चुकी थी। आगे चलकर ड्राइवर ने बोनट खोला तो चिंगारियां निकलने लगीं, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका और बढ़ गई। जितेंद्र ने बताया कि घना कोहरा होने के कारण हालात और भी खतरनाक हो गए। डर के मारे यात्री अपना सामान निकालकर सड़क पर उतर आए। यात्रियों का आरोप है कि इस दौरान ट्रेवल्स के हेड ऑफिस में कई बार फोन किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला और न ही वैकल्पिक बस की व्यवस्था की गई। मजबूरी में उसी बस को आगे बढ़ाया गया। मंडाना टोल पार करते ही एक बार फिर कोटा में सिटी मॉल फ्लाईओवर पर पहुंचते ही बस के ब्रेक फेल हो गए। नवरंग ट्रेवल्स के मैनेजर तनवीर ने आग लगने से इनकार करते हुए कहा कि बस में केवल प्रेशर पाइप फटने से धुआं निकला था। कोटा आरटीओ मनीष शर्मा ने बताया कि अभी ऐसी शिकायत नहीं मिली है। आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया है आगे मामले को दिखाकर जांच करवाई जाएगी और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि अगर समय रहते बस नहीं रोकी जाती, तो इतने यात्रियों की जान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेता?


