इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी ने पूरे प्रदेश को चेतावनी दी है, लेकिन भोपाल में हालात उससे अलग नहीं हैं। नगर निगम की ही रिपोर्ट बताती है कि भोपाल के 21 जोन में से 5 जोन पानी सप्लाई के लिहाज से डेंजर जोन बन चुके हैं। इन 5 जोन में 22 से ज्यादा वार्ड और 5 लाख से ज्यादा आबादी रहती है। इन इलाकों में करीब 400 किमी लंबी पानी की पाइप लाइन सीवेज लाइन के साथ बिछी हुई है। यह पूरी व्यवस्था 20 साल से ज्यादा पुरानी लोहे की पाइप लाइन पर टिकी है, जो अपनी उम्र पूरी कर चुकी है। नतीजा साफ है कि सबसे ज्यादा लीकेज इन्हीं इलाकों में हो रहे हैं। पानी की खराब क्वालिटी की सबसे ज्यादा शिकायतें भी यहीं से आ रही हैं। नगर निगम के मुताबिक, इन पुरानी पाइप लाइनों को बदलने के लिए करीब 500 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। भोपाल में कुल 2.71 लाख नल कनेक्शन हैं, जिनमें से करीब 75 हजार कनेक्शन की लाइन बदलना अब जरूरी हो चुका है। अमृत-2 योजना के तहत शहर में 750 किलोमीटर नई पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है, लेकिन पुराने इलाकों में पानी व सीवेज की साथ-साथ लाइनों की समस्या बनी हुई है। तैयारी 2040 की… लेकिन आज की अनदेखी नगर निगम के अनुसार, 2040 में भोपाल को हर दिन 514 मिलियन लीटर पानी की जरूरत होगी। इसके लिए 3 साल में 448 करोड़ रुपए खर्च कर नया नेटवर्क बनाया जा रहा है। अभी स्थिति यह है कि शहर को रोज 450 मिलियन लीटर पानी सप्लाई हो रहा है। 85% इलाकों में पानी सप्लाई होती है। नगर निगम अवैध कॉलोनियों में पानी नहीं देता। नल कनेक्शन 2.71 लाख से बढ़कर 3.10 लाख हो जाएंगे। ये 5 जोन सबसे ज्यादा खतरे में गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, छोला, करोंद, शाहजहांनाबाद दावा- 1000 से ज्यादा सैंपल, अब तक एक भी फेल नहीं नगर निगम का दावा है कि अब तक 1000 से ज्यादा पानी के सैंपल लिए जा चुके हैं और एक भी फेल नहीं हुआ। अब तक हजार से ज्यादा पानी के सैंपल लिए हैं। एक भी सैंपल फेल नहीं हुआ। जहां से लीकेज की शिकायत मिलती है, वहां तुरंत सुधार कराया जाता है। टीम काम कर रही है। -संस्कृति जैन, कमिश्नर, नगर निगम
गंदे पानी की शिकायत यहां करें 1800 233 0014 155304


