शहर से 60 किलोमीटर की परिधि में ऑटो रिक्शा संचालन की अनुमति की लंबे समय से अटकी प्रक्रिया को लेकर ऑटो रिक्शा चालक एक बार फिर मुखर हो गए हैं। बुधवार को बड़ी संख्या में रिक्शा चालक ट्रैफिक डीसीपी कार्यालय पलासिया पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। चालकों ने जल्द निर्णय नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। भगवा ऑटो रिक्शा चालक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में पहुंचे चालकों का कहना है कि जुलाई 2025 में इस मांग पर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन अधिकारियों के तबादले के बाद मामला फाइलों में ही अटका रह गया। सहमति के बाद नहीं बदले नियम संघ के अनुसार जुलाई 2025 में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह के साथ हुई बैठकों में ऑटो परमिट सीमा को 15 किमी से बढ़ाकर 60 किमी करने पर सहमति जताई गई थी। तत्कालीन कलेक्टर ने वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर आठ दिनों में आगे की प्रक्रिया तय करने की घोषणा भी की थी। इसके बावजूद छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नियमों में बदलाव नहीं हो सका। फिटनेस टेस्ट के नाम पर वसूली का आरोप रिक्शा चालकों ने ज्ञापन में फिटनेस टेस्ट के दौरान हो रही कथित अवैध वसूली और नंबर प्लेट के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायत भी उठाई है। चालकों का कहना है कि इन अनियमितताओं से उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इस मामले पर डीसीपी ट्रैफिक आनंद कलादगी ने रिक्शा चालकों को आश्वस्त किया कि वे सभी संबंधित विभागों से समन्वय कर मामले का शीघ्र समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। परमिट सीमा बढ़ने से मिलेंगे ये फायदे संघ अध्यक्ष वीरेंद्र त्रिपाठी के मुताबिक ऑटो रिक्शा की परमिट सीमा 60 किमी किए जाने से चालक उज्जैन, देवास, ओंकारेश्वर, धार और देपालपुर जैसे क्षेत्रों तक यात्रियों को ले जा सकेंगे। इससे यात्रियों को किफायती और सुविधाजनक परिवहन मिलेगा, वहीं शहर के भीतर ऑटो रिक्शा का दबाव भी कम होगा।


