इंदौर में गंदे पानी से 18वीं मौत:हाई कोर्ट ने कहा- गंदे पानी से मौत इंदौर की छवि पर धब्बा, ये हेल्थ इमरजेंसी, प्रदेश की रिपोर्ट दें

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से मौतों का आंकड़ा 18 पहुंच गया है। मंगलवार को कुलकर्णी नगर निवासी हरकुंवर ग्रैरईया (80) की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि महिला की मौत दूषित पानी से हुई। अब भी अलग-अलग अस्पतालों में 99 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 16 आईसीयू में हैं, जबकि 2 की हालत गंभीर है। मंगलवार को 3 नए केस सामने आए। इस बीच, मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि इंदौर जैसे शहर में दूषित पानी पीने से मौत होना बेहद गंभीर स्थिति है। यह उस शहर की छवि पर धब्बा है, जिसे लंबे समय तक देश का सबसे स्वच्छ शहर माना गया। पूरी दुनिया में इंदौर की चर्चा हो रही है, जो चिंता का विषय है। डिवीजन बेंच ने कहा कि यह मामला लोक स्वास्थ्य आपातकाल जैसा है। अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने कोर्ट में कहा कि इस मामले में खबरों के प्रकाशन पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि गलत खबरें छप रही हैं। कोर्ट ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। हाई कोर्ट ने क्या कहा- 1. स्वच्छ पेयजल हर नागरिक का अधिकार… स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। नागरिकों को साफ पानी उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है। 2. समस्या इंदौर तक सीमित नहीं हो सकती : दूषित पेयजल की समस्या केवल इंदौर तक सीमित नहीं हो सकती। मुख्य सचिव 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हों। वे बताएं कि पूरे प्रदेश में साफ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? 3. नगर निगम के हलफनामे पर सवाल : हाई कोर्ट में दायर हलफनामे में निगम ने सिर्फ 4 मौतें बताईं थी। सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया और मनीष यादव ने कहा कि निगम गलत जानकारी दे रहा है। 17 मौतें हो चुकी हैं। मंत्री पीड़ित परिवारों के घर जाकर चेक बांट चुके हैं। कोर्ट ने निगम से सवाल किया तो वकील संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। खुद केंद्र की रिपोर्ट- मप्र में 36.7% जगह नल का पानी पीने लायक नहीं हाई कोर्ट से पहले केंद्र सरकार भी मध्य प्रदेश के पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठा चुकी है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक साफ पानी पहुंचाने के दावे की हकीकत केंद्र की रिपोर्ट में सामने आई है। चार जनवरी 2026 को जारी जल जीवन मिशन की फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार, मप्र के ग्रामीण इलाकों में 36.7% पेयजल सैंपल असुरक्षित पाए गए हैं, यानी हर तीसरा गिलास पानी पीने लायक नहीं है। केंद्र ने सितंबर-अक्टूबर 2024 में राज्य के 15 हजार से ज्यादा ग्रामीण घरों से पानी के सैंपल लिए थे। कई सैंपलों में बैक्टीरिया व रासायनिक गड़बड़ियां पाई गईं। इंदौर जिले में 100% घरों में कनेक्शन के बावजूद 33% घरों में पीने योग्य पानी पहुंच रहा है। अनूपपुर व डिंडोरी में कोई सुरक्षित सैंपल नहीं मिला। बालाघाट, बैतूल व छिंदवाड़ा में 50% से ज्यादा सैंपल दूषित मिले। केंद्र ने कहा- यह सिस्टम जनित आपदा, फंडिंग घटाएंगे 28 जुलाई 2024 तक देश में 78% घरों में नल चालू हैं, पर मप्र में क्वालिटी चेक की कमी के कारण हर साल हजारों लोग बीमार हो रहे हैं। केंद्र ने चेतावनी दी है कि अगर पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो 2026 में फंडिंग घटाई जा सकती है। केंद्र ने इस स्थिति को सिस्टम जनित आपदा बताया है।

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