इंदौर में 18 फरवरी को ‘दस्तक अभियान’ का दूसरा चरण शुरू किया गया है। अभियान में 9 माह से 5 साल तक के बच्चों को विटामिन ए का डोज दिया जा रहा है। प्रथम चरण की रिपोर्ट के अनुसार 54% बच्चे एनीमिया से ग्रस्त हैं। इनमें से 0.4% बच्चों में गंभीर एनीमिया है। इन बच्चों में चिड़चिड़ापन, भूख में कमी, बच्चों का जल्दी थक जाना, सांस फूलना, सर्दी-खांसी, उल्टी, दस्त आदि बार-बार होना, उम्र के अनुसार शारीरिक और मानसिक विकास न होना, शरीर में सूजन आना जैसे लक्षण होते हैं। इसमें 9 माह से 5 वर्षीय की उम्र के बच्चों को विटामिन ए आयु अनुसार किया जाएगा। आहार से प्रतिदिन की आवश्यकता के कुल 50% ही विटामिन-ए की पूर्ति हो पाती है। इसकी कमी से दस्त और खसरे के प्रकरणों में बढ़ावा मिलता है। बच्चों में रतौंधी, कार्निया का नष्ट होना और अंधत्व प्रमुख कारण हैं। रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और संक्रमण की अधिकता हो जाती है। संक्रमण-जनित एनीमिया में भी वृद्धि होती है और बच्चों का विकास भी प्रभावित होता है।


