इंदौर शहर में संचालित हो रहे अवैध अस्पतालों को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और 16 फरवरी तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने नगर निगम को भी अपना जवाब पेश करने का आदेश दिया है। यह सुनवाई जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसानी ने कोर्ट को बताया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट से वे संतुष्ट नहीं हैं, इसी कारण रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की गई। 8 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी CMHO ने कोर्ट को अवगत कराया कि अवैध अस्पतालों की जांच के लिए 8 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। इसमें डॉ. अभिषेक निगम, डॉ. वीरेंद्र राजगीर, डॉ. निर्मला अखंड, डॉ. हिमांशु सुमन, मयूरी जाट, शैफाली बर्डे, दारासिंह वास्केल और पंकज वाडबूदे को शामिल किया गया था। CMHO ने बताया कि कमेटी की जांच रिपोर्ट से वे असंतुष्ट हैं और इसको लेकर कमेटी के सदस्यों को शोकॉज नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अब CMHO खुद करेंगे जांच CMHO द्वारा समय मांगे जाने पर कोर्ट ने निर्देश दिए कि वे स्वयं जांच कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसके साथ ही नगर निगम को भी इस मामले में जवाब पेश करने के आदेश दिए गए। याचिकाकर्ता ने लगाया जानबूझकर देरी का आरोप याचिकाकर्ता चर्चित शास्त्री की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल और जयेश गुरनानी ने कोर्ट में पैरवी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य विभाग ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर कई अस्पताल संचालकों को संचालन की अनुमति दी है, जिसके चलते शहर में बड़ी संख्या में अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं।


