इंदौर से विदेश जाने वाले यात्रियों को अब परेशान नहीं होना पडे़गा। इसके लिए एमवाय अस्पताल की नई ओपीडी बिल्डिंग में येलो फीवर वैक्सीन लगाने की सुविधा शुरू होगी। इसके लिए केंद्र की टीम शनिवार को इंदौर आई और नई ओपीडी बिल्डिंग में स्थान देखा। जल्द ही यहां येलो फीवर वैक्सीन सेंटर शुरू होगा। विदेश जाने से पहले लोग यहां वैक्सीन लगवा सकेंगे। दरअसल अभी इंदौर में येलो फीवर वैक्सीन की सुविधा नहीं होने से लोगों को भोपाल या दूसरे राज्य की ओर रुख करना पड़ता है। 40 से ज्यादा देश ऐसे हैं जहां जाने के पहले येलो फीवर वैक्सीन की जरूरत होती है। वहां येलो फीवर के काफी केस हैं। उनसे बचने के लिए येलो फीवर वैक्सीन लगवाना जरूरी है ताकि इन्फेक्शन न हो। सुपरिनटैंडैंट डॉ. अशोक यादव ने बताया कि दिल्ली से आई टीम ने नई ओपीडी में जहां सेंटर बनना है, वहां का निरीक्षण किया है। सबकुछ अनुकूल रहा तो सेंटर में जल्द ही येलो फीवर वैक्सीन लगना शुरू हो जाएगी। क्या है येलो फीवर यलो फीवर एक तरह वायरल इन्फेक्शन है जो मच्छरों की वजह से फैलता है। बुखार, पीलिया, किडनी फेल होना और लगातार ब्लीडिंग जैसे लक्षणों से इसे पहचाना जा सकता है। यह एर्बोवायरस से फैलता है और मच्छर के काटने से यह वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के सहारा क्षेत्र में यह रोग आम है। पहली बार इसका टीका 1927 में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में विकसित किया गया था। इसके बाद 1932 में इसे मनुष्यों के लिए तैयार किया गया था। खास- वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने 2013 में यह निष्कर्ष निकाला है कि यलो फीवर के लिए बनाई गई एक ही वैक्सीन जिंदगीभर तक इस बीमारी से रक्षा करने के लिए पर्याप्त है। डब्ल्यूएचओ की आवश्यक दवाओं की सूची में इसे महत्वपूर्ण दवा के तौर पर शामिल किया गया है।


