इको-टूरिज्म की असीम संभावनाएं, विधानसभा में पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने को लेकर की गई है मांग

भास्कर न्यूज| चाईबासा स्थानीय ग्रामीण तोरलो डैम को तोरो नाम से सं‍बोधित करते हैं। तोरलो डैम, पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी प्रखंड में स्थित है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यह डैम चाईबासा शहर से लगभग 25 से 30 किमी दूर स्थित है। इस डैम का निर्माण 1959 में सिंचाई व जल विद्युत उत्पादन हेतु किया गया था। डैम 100 मीटर ऊंचा व लंबाई 1.5 किमी है। डैम के आसपास का दृश्य बहुत ही सुंदर व आकर्षक है। पहाड़, हरे-भरे जंगल व झील लोगों को आकर्षित करती हैं। अक्टूबर से जनवरी महीने तक लोग पिकनिक मनाने आते हैं। डैम में जल क्रीड़ा व नौकायन की व्यवस्था सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से किया जाए तो पर्यटन के दृष्टिकोण से असीम संभावनाएं निहित हैं। सरकार के सहयोग से इस डैम में तांती टोली मत्स्य जीवी सहयोग समिति लिमिटेड, बड़ा तोरलो के द्वारा 255 समिति के सदस्य मछली पालन कर आमदनी कर रहे हैं। यदि सरकार व जिला प्रशासन के द्वारा डैम तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण, परिवहन, व्यापक प्रचार-प्रसार व सुरक्षा का इंतजाम हो तो यह क्षेत्र सैलानियों से गुलजार हो सकता है। मझगांव विधायक निरल पूर्ति द्वारा 22 मार्च को तोरलो डैम व अन्य पर्यटन स्थल को विकसित करने हेतु झारखंड विधानसभा में बात रखी गई थी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *