इनकम-टैक्स पोर्टल की खामियों का मुद्दा हाईकोर्ट पहुंचा, PIL दायर:टैक्स बार ने कहा- यूटिलिटी देरी से दी, ऑडिट रिपोर्ट की समय सीमा बढ़े

जोधपुर टैक्स बार एसोसिएशन ने इनकम टैक्स पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं और यूटिलिटी रिलीज में देरी का आधार बताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सोनी के नेतृत्व में दायर PIL में टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और इनकम टैक्स रिटर्न की ड्यू डेट्स बढ़ाने या फिर फिजिकल फाइलिंग की अनुमति देने की मांग रखी है। टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सीए अजय सोनी ने बताया कि बड़ी फर्म, ट्रस्ट, कंपनियों और व्यापारियों को सालाना ऑडिट 30 सितंबर तक पूरा करना है, जिसमें अब सिर्फ 10 दिन बचे हैं। इसी बीच नवरात्रि भी शुरू हो रही है। देशभर में हर साल लगभग 40 लाख ऑडिट रिपोर्ट डेडलाइन तक फाइल होती है। अभी तक विभाग के पास देशभर से सिर्फ 3 लाख 10 हजार ऑडिट रिपोर्ट्स ही आई हैं। व्यापारी त्योहारी सीजन में भी ग्राहकी की तरफ ध्यान देने की बजाय बिजनेस का लेखा-जोखा देने में बिजी हैं। 10 दिन में लाखों ऑडिट कैसे संभव है। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करनी पड़ी। इसी तर्ज पर गुजरात, पंजाब-हरियाणा, नागपुर, जयपुर सहित देश के कई शहरों से PIL दायर की जा रही हैं। यूटिलिटी रिलीज में देरी, 183 दिन की जगह 47 दिन मिले
टैक्स बार एसोसिएशन की तरफ से सीनियर एडवोकेट डॉ. विकास बालिया व एडवोकेट (CA) प्रतीक गट्‌टानी ने PIL दायर की है। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग की ओर से यूटिलिटी रिलीज में अत्यधिक देरी की वजह से टैक्सपेयर्स और टैक्स प्रोफेशनल्स को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (Form 3CD) के लिए यूटिलिटी 18 जुलाई को रिलीज हुई और 14 अगस्त को इसमें मेजर बदलाव किए गए। जबकि वैधानिक ड्यू डेट 30 सितंबर है। इससे करदाताओं के पास केवल 47 दिन का समय बचा, जबकि कानून के अनुसार 183 दिन का समय मिलना चाहिए था। इसी तरह, ऑडिट रिपोर्ट के लिए 244 दिन के बजाय 135 दिन ही मिले। सभी ऑडिटेड मामलों में ITR के लिए 214 दिन के बजाय 112 दिन और ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों के लिए 244 दिन के बजाय 139 दिन का समय मिला। 9 महीने से चली आ रही समस्याएं
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि नए आयकर पोर्टल के रोल आउट के लगभग 9 महीने बाद भी कई तकनीकी समस्याएं बनी हुई हैं, जिसमें- ऑडिट रिपोर्ट अपलोड की समस्याएं
याचिका में विशेष रूप से टैक्स ऑडिट रिपोर्ट से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का उल्लेख किया गया है, जिसमें – ऑडिट रिपोर्ट अपलोड बटन काम नहीं कर रहा, सर्वर एक्सेस नहीं हो रहा क्योंकि हजारों-लाखों लोग एक साथ लॉगिन करने की कोशिश कर रहे हैं। Form 29B की फंक्शनैलिटी अभी भी उपलब्ध नहीं है, जिससे MAT वाली कंपनियां रिटर्न फाइल नहीं कर पा रहीं। पुराना डेटा उपलब्ध नहीं है, शिकायतें बिना समाधान के बंद की जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट व अन्य राज्यों के फैसलों का संदर्भ याचिका में सुप्रीम कोर्ट के यूको बैंक बनाम सीआईटी मामले का हवाला देते हुए कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 119 के तहत CBDT के पास करदाताओं को अनुचित कठिनाई से बचाने के लिए लाभकारी शक्तियां हैं। इस शक्ति का उपयोग न्यायसंगत, उचित और कुशल आकलन कार्य के प्रबंधन तथा जनहित में किया जाना चाहिए। इसी तरह, ऑल गुजरात फेडरेशन ऑफ टैक्स कंसल्टेंट्स बनाम सीबीडीटी मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने CBDT को धारा 119 के तहत समयसीमा एक महीने बढ़ाने का निर्देश दिया था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी विशाल गर्ग बनाम भारत सरकार मामले में भी समान राहत दी थी। देरी से फाइलिंग में पेनल्टी का जोखिम एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की देरी से फाइलिंग पर धारा 271B के तहत पेनल्टी लगेगी, जो कुल बिक्री का आधा प्रतिशत या 1.5 लाख रुपये, जो भी कम हो, होगी। यह पेनल्टी धारा 234A के तहत ब्याज और धारा 234F के तहत लेट फीस के अतिरिक्त होगी। टैक्स बार ने की राहत की मांग टैक्स बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट से निम्नलिखित राहत की मांग की है –

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