बांग्लादेश में भारत विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमले हो रहे हैं। दूसरी तरफ यहां अवैध रूप से आए बांग्लादेशी न सिर्फ रह रहे हैं, बल्कि किसी भारतीय की तरह सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं और सुविधाएं भोग रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में यही स्थिति है। दैनिक भास्कर ने जयपुर, धौलपुर तथा भरतपुर जिलों में पड़ताल की तो सामने आया कि पुलिस की निगरानी सूची में होने के बावजूद बड़ी तादाद में बांग्लादेशी वोट तक डाल रहे हैं। पड़ताल में इनमें से कुछ ने खुद अपने राज खोले हैं। बताया कि उन्होंने इतनी आसानी से आधार कैसे बनवा लिया। ऐसे भी अवैध नागरिक सामने आए, जो एक-दो माह में वोटर कार्ड बनवा लेने का दावा पूरे विश्वास के साथ कर रहे हैं। धौलपुर जिले में कई ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने बाहर किसी प्रदेश में आधार बनवाया है। या फिर जिले में जिस जगह का आधार इनके पास है, वहां इन्हें कोई नहीं जानता। भरतपुर में क्रशर ठेकेदारों ने भी कुछ को शरण दे रखी है। वे बांग्लादेशी मजदूरों को चोरी-छिपे ट्रेन के माध्यम से कोलकाता से होते हुए यहां तक ले आते हैं। वहीं जयपुर में ये आराम से जेडीए के मकानों में रह रहे हैं। राजधानी की भांकरोटा थाना पुलिस ने अक्टूबर-नवंबर में 12 बांग्लादेशियों पर कार्रवाई की है। UIDAI ने आधार बना दिया 200 रु. देकर मिल गई पहचान इस्लाम बांग्लादेश के खुलना के फूलथना का है। 2008 में इलाज के बहाने भारत आना बताया। 2012 में आगरा से 200 रुपए में आधार कार्ड बनवाया था। फिलहाल वह धौलपुर के शेखपुर में मोरोली मोड़ पर रहता है। यहीं रहने वाली आलिया खुद को प.बंगाल के नादिया की निवासी बताती है, लेकिन बांग्लादेशी है। पति का नाम नाजिम बताती है, उसने हमें नाजिम के दस्तावेज दिखाए। दस्तावेजों में नाजिम की पत्नी का नाम रेशमा दर्ज है। पता राठौड़ कॉलोनी, धौलपुर का है। हमारी पड़ताल और पुलिस की जानकारी में राठौर कॉलोनी में आलिया-नाजिम नाम का कोई शख्स कभी नहीं रहा। चुनाव आयोग ने बनाया वोटर विधानसभा चुनाव में वोट भी डाले हिना बानो का नाम जयपुर के सांगानेर थाना में बांग्लादेश नागरिक वाली सूची में दर्ज है। फिर भी उसके पास बक्शावाला स्थित जेडीए कॉलोनी में आवंटित जेडीए का मकान है। मिशन बसेरा के तहत दिए इसी मकान के पते का वोटर कार्ड भी है। विधानसभा चुनाव में वह वोट डाल चुकी है। हिना के पड़ोस के मकान में रहने वाली हसीना के पास भी वोटर कार्ड है और जेडीए का मकान भी। वह हर माह 1100 रु. की सरकारी पेंशन और राशन भी ले रही है। कहां से आकर यहां बसे?- इस सवाल पर कोई जानकारी न होने की बात कहती है। माता-पिता कहां रहते थे, यह भी नहीं पता। सरकार से मिल गया बसेरा वृद्धावस्था पेंशन भी ले रहे पति-पत्नी जयपुर की बक्शावाला जेडीए कॉलोनी में रहने वाले 62 वर्षीय बांग्लादेशी फजलू हक के पास आधार-जनआधार है। राज्य सरकार की बुजुर्गों को मिलने वाली एक हजार रुपए पेंशन भी ले रहा है। पत्नी को भी 1100 पेंशन मिल रही है। हैरानी यह है कि मिशन बसेरा के तहत जेडीए ने उसे मकान तक आवंटित कर दिया। फजलू कह रहा है-अगले माह कैंप लगेगा तो वोटर लिस्ट में नाम जुड़ जाएगा। यहां बक्शावाला में करीब 80 बांग्लादेशी रह रहे हैं। पुलिस इन्हें समय-समय पर थाने बुलाकर तस्दीक करती है। “पहले जन-प्रतिनिधि भी लिखकर दे देते थे, तो आधार बन जाता था। उस दौरान इस तरह के आधार बन गए थे। अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों के पास आधार हैं तो जांच करवा कर कार्रवाई करेंगे।”
-राकेश कुमार वर्मा, जॉइंट डायरेक्टर, UID प्रोजेक्ट “वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए आधार मांगा जाता है। इनके फॉर्म की तस्दीक रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा की जाती है। यदि कोई मामला है, डिटेल भेजो, जिला निर्वाचन अधिकारी से जांच करवाकर, नाम हटवाएंगे।”
-नवीन महाजन, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राजस्थान “सरकार की मिशन बसेरा योजना में कच्ची बस्ती के लोगों के पुनर्वास के लिए मकान आवंटित किए जाते हैं। बक्शावाला में बांग्लादेशी लोगों को मकान आवंटन की मुझे कोई जानकारी नहीं है।”
-शिवप्रसाद सिंह, एडिशनल कमिश्नर, रिहैबिलिटेशन, जेडीए


