इरफान थिएटर फेस्टिवल में किस्से किनारों के नाटक का मंचन:आरआईसी में सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्षों की कहानी को युवा कलाकारों ने किया जीवंत

दिवंगत अभिनेता इरफान खान के 58वें जन्मदिन पर आरआईसी में आयोजित इरफान थिएटर फेस्टिवल ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सिनेमा और रंगमंच में उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित इस तीन दिवसीय उत्सव का आयोजन पर्यटन विभाग, कला और संस्कृति विभाग और प्रोग्रेसिव फोरम के सहयोग से किया जा रहा है। फेस्टिवल के दूसरे दिन, निर्देशक अभिषेक गोस्वामी के नाटक “किस्से किनारों के” ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। नाटक की शुरुआत आदम गोंडवी की प्रभावशाली कविता “आइए महसूस करिए जिदगी के ताप को…” के पाठ से हुई। इसके बाद प्रेमचंद की कहानी “सद्गति”, डॉ. भीमराव आंबेडकर की आत्मकथा “वेटिंग फॉर ए वीजा” और ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानी “शवयात्रा” के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्षों की जीवंत प्रस्तुति दी गई। फोक गीतों की संगीत धारा ने नाटक की प्रस्तुति को और सशक्त बनाया। हीरा डोम का “ऐसे हम करमहीन” और आशु ठाकुर का “सूनी रे मढ़ैया मोरी” जैसे गीतों ने नाटक के संदेश को गहराई से प्रस्तुत किया। नाटक का समापन अली सरदार जाफरी की नज्म “कौन आजाद हुआ?” के प्रभावी पाठ के साथ हुआ, जिसने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। फेस्टिवल का रोमांच 8 जनवरी को और बढ़ेगा, जब निर्देशक अभिषेक मुद्गल का नाटक “महारथी” मंचित होगा। यह नाटक महाभारत के कर्ण पर आधारित है और पारंपरिक छऊ नृत्य कला के माध्यम से एक अनोखी प्रस्तुति देगा।

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