इलाज में लापरवाही से मौत का मामला:धमधा के श्रेया अस्पताल के मैनेजर और डॉक्टर को पुलिस ने किया गिरफ्तार

इलाज में लापरवाही से एक महिला की मौत के मामले में धमधा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए श्रेया अस्पताल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर के प्रबंधक और एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उन्हें न्यायालय में पेश किया है। श्रेया अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर, डॉ. अभिषेक पांडेय और प्रबंधक मनीष राजपूत ने इलाज में लापरवाही करने के साथ ही शव के साथ दुर्व्यवहार किया। इसलिए दोनों पर यह कार्रवाई की गई है। शव को लावारिश छोड़कर चले गए थे कर्मचारी
मामले के अनुसार श्रेया अस्पताल के कर्मी अपने यहां भर्ती पद्मा नाम की महिला को परिजनों को बताए बगैर शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज लेकर निकल गए। मेडिकल कॉलेज की कैजुअल्टी में जैसे ही महिला के मृत होने की जानकारी दी गई, वे शव को लावारिश छोड़कर वहां से निकल गए। महिला के परिवार के सदस्य अगले दिन उसे देखने गए तो अस्पताल प्रबंधन ने उसके मृत होने व शव शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज में होना बताया। मामले की जांच के दौरान पुलिस को प्रथम दृष्टया अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर द्वारा उपेक्षापूर्ण एवं लापरवाहीपूर्ण चिकित्सकीय कार्य के साक्ष्य मिले। इसके आधार पर थाना धमधा में अपराध दर्ज कर विवेचना की गई। आंगन में गिरने से लगी थी चोट
इस मामले में प्रार्थी चिरज वर्मा ने थाना धमधा में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 10 अक्टूबर 2025 की रात करीब 10 बजे उनकी 57 वर्षीय माता पदमाबाई वर्मा घर के आंगन में गिर गई थीं, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई। 11 अक्टूबर 2025 को उपचार के लिए उन्हें श्रेया अस्पताल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर, धमधा में भर्ती कराया गया। परिजनों की सहमति के बिना किया था रेफर
अस्पताल में 13 अक्टूबर को उनके पैर का ऑपरेशन किया गया। 14 अक्टूबर को जब पदमाबाई वर्मा की तबीयत ज्यादा खराब हो गई और उनकी सांसें तेज चलने लगीं, तब अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें हायर सेंटर रेफर किया। रेफर करने से पहले परिजनों से सहमति नहीं ली गई और एम्बुलेंस में आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा व डॉक्टर मौजूद नहीं था। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना है कि यदि रेफर करते समय उचित मेडिकल केयर और डॉक्टर की मौजूदगी होती, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। अस्पताल का लाइसेंस भी निरस्त
धमधा के श्रेया अस्पताल के डॉक्टर व प्रबंधक पर एफआईआर के बाद नर्सिंग होम एक्ट से अस्पताल को प्राप्त लाइसेंस भी (DURG0473 /HOS) निरस्त कर दिया गया है। महिला के इलाज में लापरवाही और शव से दुर्व्यवहार किए जाने के मामले में जांच रिपोर्ट आने के 43 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निसस्त किया था। जांच के बाद एफआईआर और गिरफ्तारी
इस मामले में जांच के बाद पुलिस ने श्रेया अस्पताल के प्रबंधक मनीष राजपूत (42 वर्ष), निवासी ग्राम भरनी, जिला दुर्ग और डॉक्टर अभिषेक पाण्डेय, निवासी मॉडल भिलाई, चौकी स्मृति नगर, थाना सुपेला को गिरफ्तार किया।

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