इस बार फूलों से बने 2 सफेद घोड़ों ने गुरुद्वारा साहिब  की शान में लगाए चार चांद

मलेरकोटला रोड स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब एक पवित्र स्थल है, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने चरणों की छाप छोड़ी थी। तभी से इस स्थान पर हर साल 3 दिन का जोड़ मेला लगाया जाता है। इसमें देश-विदेश से लाखों संगतें दर्शन करने के लिए पहुंचती हैं। इस गुरुद्वारे की सजावट का जिम्मा पिछले 10 वर्षों से युवा श्रद्धालु लेते हैं, जो 15 दिन अपने कामकाज को छोड़कर लगातार 10 घंटे सेवा करते हैं और इस पवित्र स्थल को संजोते हैं। गुरुद्वारा मंजी साहिब की सजावट को लेकर कमलजीत सिंह बिट्टू ने बताया कि उन्होंने आलमगीर गुरुद्वारा मंजी साहिब सजावट जत्था बनाया हुआ है। इसमें आलमगीर गांव के रहने वाले 25 युवा शामिल हैं। इनकी उम्र 25 से 40 के बीच है। ये युवा मध्यम वर्ग के हैं जो अलग-अलग कार्य करते हैं, लेकिन जब जोड़ मेला आता है, तो सभी मिलकर एक साथ मीटिंग करते हैं और इस बार गुरुद्वारे को किस प्रकार सजाना है, इसका डिजाइन तैयार करते हैं। बिट्टू ने यह भी बताया कि हर साल, यह युवा अपनी मेहनत से इकट्ठा किए गए धन को इस सजावट में लगा देते हैं। इस साल की सजावट के लिए 5 लाख रुपये का खर्च आया है, जिसमें 20 प्रकार के फूलों का उपयोग किया गया है। इस बार, सजावट में खासतौर पर 2 सफेद फूलों से बने घोड़े आकर्षण का केंद्र बने। पिछले साल, गुरु ग्रंथ साहिब जी के पीछे मोर का डिजाइन तैयार किया गया था, जो बहुत ही खूबसूरत था। इस बार दरबार साहिब के फ्रंट गेट पर साहिब-ए-कमाल गुरु गोबिंद सिंह फूलों से लिखा गया है। यह इस आयोजन की भव्यता को और बढ़ाता है। कमलजीत सिंह बिट्टू ने यह भी बताया कि आलमगीर श्री मंजी साहिब के अलावा, वे आनंदपुर साहिब और सुल्तानपुर लोधी जैसे पवित्र स्थलों पर भी जाकर गुरुद्वारा साहिब की सजावट करते हैं। इस साल की सजावट को देखकर संगत भी हैरान रह गई। दरबार हाल के अंदर, रंग-बिरंगे फूलों के साथ एलईडी लाइट्स भी जल रही थीं, जो एक अद्भुत दृश्य उत्पन्न कर रही थी। संगतें इस भव्य सजावट को देखकर वाहेगुरु का सिमरन करते हुए अपनी श्रद्धा अर्पित कर रही थीं। 10 साल से 25 युवा अपनी कमाई से हर गुरु पर्व पर श्री मंजी साहिब गुरुद्वारा की करते हैं सजावट

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