भास्कर खास इस साल मानसून समय से पहले आएगा। करीब 108% बारिश का अनुमान है। इसे देखते हुए किसान उत्साहित हैं। धान की बुआई की तैयारी शुरू कर दी है। अनुकूल मौसम को देखते हुए इस बार राज्य में 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि अगर अनुमान के अनुसार बारिश हुई तो धान की रिकॉर्ड पैदावार होगी। इससे पहले 2022 और 2023 में सुखाड़ की वजह से राज्य में धान का उत्पादन प्रभावित हुआ था। बिचड़े खेतों में ही सूख गए थे। हजारों हेक्टेयर खेतों में खड़ी फसल में बाली ही नहीं आ पाई थी। इससे 2022 में सिर्फ 19.09 लाख टन और 2023 में 32.10 लाख टन धान का उत्पादन हुआ था। -शेष पेज 11 पर पिछले साल 15.96 लाख हेक्टेयर में हुई थी खेती झारखंड की मुख्य खरीफ फसल धान है। कुल 28.27 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसल की खेती होती है। इनमें 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। पिछले साल राज्रू में 15.96 लाख हेक्टेयर में धान की रोपनी की गई थी, जो लक्ष्य का 88.68% था। लेकिन इस बार 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। पिछले सात साल में धान की पैदावार (पैदावार लाख टन में) 28.94 कृषि वैज्ञानिक की सलाह-खेतों की जुताई शुरू कर दें: बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. डीएन सिंह ने कहा-धान की खेती के लिए बेहतर अवसर है। मई में भी अच्छी बारिश हुई है। इसलिए किसान खेतों की जुताई शुरू कर दें। इससे खर-पतवार की समस्या तो खत्म होगी ही, कीड़ों का प्रभाव भी कम होगा। बारिश होने से खेतों में पानी रुकेगा। किसान मध्यम अवधि (120-125 दिन) वाला धान लगाएं। रामगढ़ के दुलमी में 200 एकड़ में गरमा धान की फसल लहलहा रही है। इसकी रोपनी फरवरी में होती है और जून-जुलाई में फसल तैयार हो जाती है।


