ई-ऑफिस के बाद आउटसोर्स भर्ती पर भी लगी रोक:राज्य सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आउटसोर्स नियुक्ति के पुराने आदेश किए निरस्त

राज्य सरकार ने ई-ऑफिस की ओर बढ़ने के बाद फाइल लाने, ले जाने और बाहर डाक पहुंचाने का काम खत्म होने से अब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आउट सोर्स से की जा रही भर्ती पर भी रोक लगा दी है। अब आउट सोर्स एजेंसी के माध्यम से भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती नहीं की जा सकेगी। चतुर्थ श्रेणी के पद भरे जाने पर पहले से ही रोक लगी हुई है। इससे पहले चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित भर्ती न होने से सरकार ने 2023 और 2024 में आउट सोर्स (ठेकेदारों) के माध्यम से पद भरे जाने के नियम बनाए थे। इसमें आउटसोर्स पर रखे कर्मचारी के लिए नियमित चतुर्थ श्रेणी के समान ही सुविधाएं और लाभ देने का प्रावधान किया गया था। वित्त विभाग ने गुरुवार को सर्कुलर जारी कर ये सभी पुराने आदेश निरस्त कर दिए हैं, जिससे अब चतुर्थ श्रेणी के पदों पर आउटसोर्ट के माध्यम से भर्ती नहीं की जाएगी। मंत्री स्थापना में पदस्थ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियमित किए जाने का मामला अटका अभी सरकार ने मंत्रालय में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर जो कर्मचारी मंत्री स्थापना में काम कर रहे हैं उन्हें नियमित किए जाने में किसी तरह की रोक नहीं लगाई है। पूर्व में इन कर्मचारियों को नियमित किए जाने के लिए परीक्षा का आयोजन भी किया गया, लेकिन जीएडी ने भर्ती प्रक्रिया परीक्षा सही नहीं होने से परीक्षा ही निरस्त कर दी थी। नई संशोधित परीक्षा के बारे में अब तक कोई कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है। प्रदेश में अभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमित 60 हजार पद हैं, जिन पदों को खत्म नहीं किया गया है, लेकिन इनमें से अधिकांश चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रिटायर हो गए हैं। इससे प्रदेश में इनकी संख्या 20 हजार के करीब ही बची है। जानिए… क्या थी तीन साल पुरानी व्यवस्था वित्त विभाग ने 31 मार्च 2023 को विभिन्न विभागों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों की सेवाएं आउटसोर्स के माध्यम से रखे जाने को लेकर नीति तैयार की थी। इसमें नियमित भर्ती में हो रही देरी से तात्कालिक आवश्यकताओं को देखते हुए पदों को पहले विभागाध्यक्ष (एचओडी) के द्वारा चिन्हित किया जाना था । इसके बाद आउटसोर्स एजेंसी का चयन विभागाध्यक्ष द्वारा करना और आउट सोर्स कर्मचारियों की सेवाएं सिर्फ बजटीय योजनाओं के अंतर्गत की जानी थीं। एजेंसी की न्यूनतम निविदा राशि का निर्धारण कर्मचारियों को देय पारिश्रमिक ईपीएफ और ईएसआई को जोड़कर एजेंसी के प्रबंधन शुल्क 10% जोड़कर करना था । इस आदेश के लिए निरस्त कर दिया गया है।

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