उच्च शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश जारी, यूजी-पीजी के सिलेबस अपडेट होंगे, साल में दो बार दाखिले की तैयारी

भास्कर न्यूज | जालंधर जेईई-एडवांस्ड 2025 की परीक्षा के प्रवेश पत्र 11 मई को जारी होंगे। परीक्षा 18 मई को देश के 222 शहरों में सुबह नौ से दोपहर 12 और दोपहर 2:30 से शाम 5:30 बजे तक दो पालियों में होंगी। इस वर्ष 1.90 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने इसमें आवेदन किया है। जेईई एडवांस्ड परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र के साथ कोई भी एक ओरिजनल आईडी प्रूफ साथ लेकर जाना होगा। प्रवेश पत्र में दिए बारकोड के माध्यम से परीक्षा केंद्रों के एंट्री पॉइंट पर ही लैब आवंटित होगी। कंप्यूटर सिस्टम परीक्षा शुरू होने के आधा घंटा पहले आवंटित होगा। इस पर विद्यार्थी का नाम, फोटो एवं रोल नंबर होंगे। स्टूडेंट्स कंप्यूटर पर अपना रोल नंबर एवं स्वयं की जन्म तिथि पासवर्ड की तरह डालकर लॉगिन कर सकता है। रफ कार्य के लिए प्रत्येक पेपर में स्क्रैबल पैड दिए जाएंगे। परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों को किसी तरह की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने की अनुमति नहीं होगी। रिंग, ताबीज, नोज पिन आदि पहनकर न जाने की सलाह दी गई है। भास्कर न्यूज | जालंधर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में चल रहे यूजी-पीजी के सभी एकेडमिक प्रोग्राम को रिवाइज करने का निर्देश दिया है। इसके लिए यूजीसी की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर उच्च शैक्षणिक संस्थानों को सूचित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार, करिकुलम में बदलाव कर उसे लागू करने को कहा गया है। यूजीसी ने यूजी-पीजी कोर्स के लिए नया-2025 रेगुलेशन जारी किया है। उसके अनुसार, सिलेबस को अपडेट कर लागू करने की तैयारी है। इसके तहत साल में दो बार विद्यार्थियों को दाखिला देने की तैयारी की जा रही है। छात्र जुलाई या जनवरी में (जिसमें सुविधा हो) दाखिला ले सकेंगे। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में कोर्स की डिग्री जारी होगी। क्रेडिट सिस्टम और मल्टीपल एंट्री और एग्जिट भी होगा। इसके तहत बीच में पढ़ाई छूटने पर भी वह पुन: अपना कोर्स पूरा कर सकेंगे। साथ ही डुअल कोर्स सिस्टम भी होगा, यानी पीजी में एक साथ दो डिग्री कोर्स छात्र-छात्राएं कर सकेंगे। पुराने पाठ्यक्रम में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला और 21वीं सदी की मांगों के अनुरूप बनाने तथा उसे लागू करने को कहा गया है। नए 2025 रेगुलेशन के अनुसार, पाठ्यक्रम को अपडेट कर लागू करने की तैयारी है। एक वर्ष का स्नातक करने पर छात्राएं को सर्टिफिकेट, दो वर्ष का करने पर डिप्लोमा, तीन वर्ष का करने पर स्नातक की सामान्य डिग्री मिलेगी। चार वर्षीय स्नातक का कोर्स करने पर चार वर्षीय स्नातक की डिग्री मिलेगी। ऐसे में एक वर्ष का पीजी कोर्स ही मात्र करना होगा। तीन वर्षीय स्नातक करने वालों को दो वर्ष का पीजी करना होगा। यूजी-पीजी इंटिग्रेटेड कोर्स भी होंगे। सेमेस्टर सिस्टम से पढ़ाई होगी। हर छह माह में परीक्षाएं होंगी। राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क, राष्ट्रीय उच्च शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क, स्नातक कार्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम और क्रेडिट फ्रेमवर्क, शॉर्टटर्म कौशल मॉड्यूल के माध्यम से शिक्षाविदों में कौशल को शामिल करना, ट्रेनिंग डिग्री प्रोग्राम, इंटर्नशिप और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम और क्रेडिट फ्रेमवर्क को शामिल किया जाएगा। यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, रटने के बजाय वैचारिक समझ, आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और बहु-विषयक सीखने पर जोर दिया गया है। संशोधित पाठ्यक्रम सामग्री बनाई जाएगी। उसमें जीवन कौशल को शामिल किया जाएगा और व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने का उद्देश्य है।

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