उत्तराखंड की संस्कृति का लखनऊ में जलवा:पर्वतीय महापरिषद के कौथिग में झोड़ा-चांचरी पहाड़ी लोक संगीत ने बांधा समां

लखनऊ में उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला। पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित 10 दिवसीय उत्तरायणी कौथिग के पांचवें दिन सात झोड़ा दलों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कार्यक्रम में हेमा वांणगी, चित्रा काण्डपाल, सविता बिष्ट, दीपा पाण्डेय, सोनू जोषी, सोनिया बिष्ट और मंजू पाण्डेय के नेतृत्व में कई दलों ने पारंपरिक झोड़ा और चांचरी नृत्य प्रस्तुत किए। इन दलों ने उत्तराखंडी लोक गीतों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पहाड़ी धुनों पर देसी ठुमका लगाया सांस्कृतिक कार्यक्रम में ‘पहाड़ी धुनों पर देसी ठुमका’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें माही वेलफेयर समेत कई प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। ‘पहाड़ की आवाज’ प्रतियोगिता में गोविन्द बोरा, मंजू पाण्डेय सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनिल चौधरी और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक पी. बी सिंह ने सायं सत्र का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में पर्वतीय महापरिषद के प्रमुख सदस्यों की गरिमामय उपस्थिति रही। समारोह में उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक स्व. प्रहलाद मेहरा और स्व. पप्पू कार्की को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। उनके बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए उनके लोकप्रिय गीतों ने वातावरण को भावुक कर दिया।

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